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AP Transgender Employee : कंप्यूटर साइंस में स्नातक जानकी आंध्र प्रदेश की बनी पहली ट्रांसजेंडर कर्मचारी

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AP Transgender Employee

AP Transgender Employee बेघर की जिंदगी गुजारती हैं जानकी

AP Transgender Employee : ट्रांसजेडर जिन्हें हम आम बोल चाल में हिजड़ा भी कहते है हमारे देश का वह वर्ग है जिसे आज भी घृणा की नजरों से देखा जाता है.

तमाम काबिलियत होने के बावजूद उन्हें उनका हक नहीं मिल पाता और अगर मिलता भी है तो कड़े संघर्ष के बाद.
जन्म के बाद से ही कई तरह के तिरस्कारों का सामना करने वाले इन ट्रांसजेंडरों का आत्मविश्वास इस कदर टूट जाता है कि वह अनाथों और बेघरों की तरह जिंदगी जीने को मजबूर हो जाते हैं.
लेकिन आज हम आपको एक ऐसी ट्रांसजेंडर की कहानी बताएंगे जिन्होंने सरकार की मदद से एक नए बदलाव की इबादत लिखी है.
26 वर्षीय ट्रांसजेन्डर पेणुगोंडा शिव उर्फ जानकी एक बेघर की जिंदगी गुजारती हैं ना तो उनके पास कोई अपना कहने वाला परिवार है और न ही कोई अन्य सहारा.
वह आंध्र के कडप्पा जिले के चेन्नुरु के कुछ अन्य ट्रांसजेंडर दोस्तों के साथ मंदिर में रहती हैं.लेकिन फिलहाल वो बहुत खश हैं क्योंकि उन्हें उस योजना का हिस्सा बनाया जा रहा है जो अब उन जैसे लोगों के लिए घर बनाएगी.
जानकी आंध्र प्रदेश की चन्द्रबाबू नायडू सरकार द्वारा शुरू की गई नीति की पहली लाभार्थी हैं, जो उनके जैसे ट्रांसजेड़रों को पूरी गरिमा के साथ जीवन जीने में मदद कर रही है.
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पढ़ाई का मिला फायदा
कम्प्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री (बैचलर ऑफ साइंस) के आधार पर जानकी को 15,000 रुपये प्रति माह के एक निश्चित वेतन के साथ राज्य आवास निगम में एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में नौकरी की पेशकश की गई है.
फिलहाल वह बतौर सहायक इंजीनियर (एई) के तौर पर चेन्नुरु के हाउसिंग कॉरपोरेशन के कार्यालय में तैनात हैं.
अपनी इस नौकरी के बारे में जानकी का मानना है कि उनके लिए नौकरी की पेशकश बहुत हैरानी भरा पल था.
उन्होंने बताया कि सरकार की एक नीति के तहत हम सभी (ट्रांसजेंडर व्यक्ति) को आधार और मतदाता पहचान पत्र लेकर जिला कलेक्टर द्वारा बुलाया गया और हमें संबोधित करते हुए कलेक्टर सर ने हमसे पूछा कि हममें से शिक्षित कौन हैं.
जिसके बाद मैंने उन्हें बताया कि मैं कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक हूं और बी एड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) भी कर रही हूं. मुझे तब ज्यादा आश्चर्य हुआ जब उन्होंने मुझे नौकरी के लिए आवेदन करने के लिए कहा. और जब मैंने ऐसा किया तो आखिरकार मुझे नौकरी मिल गई.
बता दें कि नायडू सरकार ने हाल ही में एक ट्रांसजेंडर पॉलिसी की घोषणा की है. जिसके अंतर्गत इस समाज के लोगों को पेंशन, राशन, मकानों, शिक्षा और सार्वजनिक क्षेत्रों में स्व-रोजगार हासिल करने के लिए के लिए सरकार की तरफ कर्ज भी प्रदान किया जाता है.
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परिवार के स्नेह को नहीं भुला पाती
जानकी ने बताया कि 2012 में प्रोड्डातुर कॉलेज से डिग्री प्राप्त करने के बाद वो घर से भागने से पहले बीएड कॉलेज में दखिला और एक ट्रांसजेंडर समूह में शामिल हो गई थी. इसके बाद उनकी उपस्थिति बदल गई है और वो एक अनाथ के जीवन जैसा जीना शुरू कर दिया.
जानकी ने कहा कि वो अपने परिवार से मिलना चाहती थी मगर उन्हें परिवार से दूर रहने के लिए कहा गया. उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि कोई परिवार और उसके स्नेह को नहीं भूल सकता है. परन्तु, जब परिवार हमें कलंक के रूप में देखता है, तो हम कुछ नहीं कर सकते.
जानकी का लक्ष्य कंप्यूटर विज्ञान में पोस्टग्रेजुएशन करके शिक्षण क्षेत्र में कैरियर बनाना है.
वहीं एपी हाउसिंग कॉर्पोरेशन कडप्पा जिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजशेखर ने कहा कि वह अपनी नौकरी अच्छी तरह से कर रही है. प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी एक सार्वजनिक बैठक में पहले ट्रांसजेंडर कर्मचारी के रूप में उनका उल्लेख किया है.

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