Home देश दिल्ली हाईकोर्ट में 7 वर्षीय नव्या ने डाली अपने हक की जनहित...

दिल्ली हाईकोर्ट में 7 वर्षीय नव्या ने डाली अपने हक की जनहित याचिका

SHARE
फोटो साभार-डीएनए
फोटो साभार-डीएनए
दिल्ली में 7 वर्षीय नव्या ने अपने घर के पास वाले पार्क में चल रहे अवैध निमार्ण को रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने अपनी याचिका में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) पर बच्चों के खेलने की आजादी को छीनने का आरोप लगाया है.
नव्या ने अपनी जन हित याचिका में कोर्ट के माध्यम से डीडीए के अधिकारियों को रोहिणि सेक्टर 8 हनुमान मंदिर पार्क के अंदर बहु-मंजिला सामुदायिक हॉल का निर्माण रोकने की मांग की है.
इस बारे में याचिकाकर्ता नव्या का कहना है कि मेरे शिक्षक ने कहा है कि मुझे पार्क जाना चाहिए और खेलना चाहिए. मगर इस निर्माण कार्य के कारण, मैं वहां नहीं जा सकती हूं .
वहीं इस याचिका को सही ठहराते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से सामुदायिक हॉल के निमार्ण पर रोक लगा दी है. और संबंधित अधिकारियों से जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल करने पर स्पष्टिकरण मांगा है.
दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने इस याचिका पर लेफ्टिनेंट गवर्नर, डीडीए और उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के कार्यालय को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है. इसके अलावा अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या उन्होंने पार्क को एक सामुदायिक हॉल में परिवर्तित करने के लिए आस पास रहने वाले लोगों से एनओसी प्रमाण पत्र लिया था.
क्या कुछ कहा गया याचिका में
अपने वकिल पिता की मदद से नाबालिग नव्या द्वारा दायर याचिका में दलली दी जाती है कि उनकी बेटी और इलाके के अन्य बच्चों को इस बहुमंजिला निमार्ण से काफी परेशानी हो रही है. इसके अलावा पार्क के अंदर डीडीए के इस अवैध बहुस्तरीय सामुदायिक हॉल के निमार्ण ने 30 वर्षीय पार्क की सुंदरता को भी नष्ट कर दिया है.
याचिका में कहा गया कि डीडीए का निर्णय ‘गरीब योजना’ और सार्वजनिक धन की बर्बादी का एक स्पष्ट उदाहरण है. क्योंकि 50 मीटर की दूरी पर ही एक अन्य वातानुकूलित सामुदायिक हॉल पहले से ही मौजूद है.
अदालत ने अपनी सुनवाई में डीडीए द्वारा हॉल के निमार्ण पर खर्च की गई राशि का विवरण मांगा है. और 18 सितंबर की अगली तारीख तक उसे यह भी बताने के लिए कहा गया है कि पार्क में सामुदायिक केंद्र बनाना क्यों आवश्यक था.
साभार-डीएनए