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विदेशी ट्रैक पर दौड़कर गोल्डन गर्ल बनी हिमा के इस अंदाज के कायल हुए पीएम मोदी

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Athlete Hima Das Won Gold

Athlete Hima Das Won Gold : हिमा ने आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है

Athlete Hima Das Won Gold : डेढ़ साल पहले तक जो नाम अपने गांव की गलियों तक ही सीमित था आज वो देश और दुनिया के लोगों के कान में गूंज रहा है.

दरअसल भारत की 18 साल की हीमा ने एथलीट्स की दुनिया में वो कर दिखाया जिसे पूरा करना बहुत से एथलीटों के लिए महज एक सपना ही है.
महज डेढ़ साल पहले ट्रैक पर कदम रखी इस बेटी ने आज भारत का नाम दुनिया भर में रोशन कर दिया.
नार्थ इस्ट राज्य असम के नायगांव में किसान के घर जन्मीं हीमा ने अंडर 20 विश्व एथलेटिक्स चैंपयिनशिप के 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर एक ऐसे दौर की शुरुआत की है जहां से अब इस खेल में हम सभी को और मेडलों की उम्मीद रहेगी.
बता दें कि विश्व चैपिंयनशीप में गोल्ड जीतने वाली हिमा पहली भारतीय है और इन सबके पीछे इसमें सबसे बड़ा हाथ जिसका है वो  हैं कोच निपुन, ऐसा क्यों आइए जानते हैं..
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हीमा ने नहीं निपुन ने देखा सपना
हीमा दास का खेलों के प्रति बचपन से ही काफी रूझान था. हीमा अक्सर खेतों में लड़कों के साथ फुटबॉस खेला करती थी लेकिन वो सिर्फ वहीं तक सीमित थी.
तभी उनके भागने की तेज गति देखकर वहां के एक लोकल कोच ने उन्हें एथलेटिक्स में खुद को आजमाने की सलाह दी जिसे हीमा ने गंभीरता से लिया और दौड़ना शुरू कर दिया.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक उसी दौरान डायरेक्टरेट ऑफ स्पोर्ट्स एंड वेलफेयर के कोच निपुन दास की नजर उनपर पड़ी. दरअसल इंटर डिस्टिक्ट के 100 मीटर और 200 मीटर प्रतियोगिता में हीमा सस्ते स्पाइक्स पहनने के बावजूद दोनों इवेंट में गोल्ड जीता.
हीमा की इसी तेजी ने निपुन को प्रभावित होने के साथ साथ हैरान भी किया. उन्होंने सालों में इस तरह की प्रतिभा नहीं देखी थी और फिर देर ना करते हुए उन्होंने हीमा के परिवार से जाकर बात की और हीमा को गुवाहाटी ले आए.
जो सपना उस वक्त शायद हीमा की आंखों में भी नहीं था निपुन उसे मुकम्मल करने की ठान चुके थे. छह बच्चों के मां-बाप अपनी सबसे छोटी बेटी तो खुद से दूर नहीं करना चाहते थे, लेकिन कोच निपुन के सामने उनकी एक ना चली.
गुवाहाटी लाने के बाद कोच निपुन ने हीमा को सारूसजाई स्पोर्ट्स कॉमपलेक्स में दाखिला दिला दिया यह जानते हुए कि वहां एथलीट्स के लिए कोई अलग विंग नहीं है. वहां खासतौर पर फुटबॉल और बॉक्सिंग के लिए ही खिलड़ियों को तैयार किया जाता था.
हालांकि हीमा दास ने यहां भी लोगों को अपनी प्रतिभा से चौंकाते हुए एकेडमी में जगह बना ली और फिर इसके बाद तो मानो कभी पीछे मुड़कर ही नहीं देखा.
आपको बता दें कि है कि वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपयिनशिप में हीमा के इस प्रदर्शन की उम्मीद उनके कोच निुपन को भी नहीं थी. शुरुआत में वो बस इतना चाहते कि हीमा एशियन गेम्स में रिले टीम का हिस्सा हो, लेकिन हीमा ने उम्मीद के परे प्रदर्शन करके उन्हें ऐसी गुरू दक्षिणा दी है जो वो शायद कभी नहीं भूलें .
वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल शुरुआत में सबसे पीछे चल रही हीमा ने अखिरी कुछ मीटरों में तेजी दिखाई थी. जैसे ही वह फिनिशिंग लाइन के पास पहुंची कमेंटेटर ने कह ना शुरू किया कि ‘हीमा दास को फिलहाल बस फिनिशिंग लाइन दिख रही है, उन्हें उस लाइन के उस तरह एक सुनहरा इतिहास दिख रहा है’.
वाकई में हीमा ने अपनी इस जीत के साथ ये ङी साबित कर दिया कि उनके कदम इस तरह के ट्रैक और कई ऐसी फिनिशनिंग लाइन क्रोस करने के लिए बने हैं.
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पीएम मोदी को भाया हिमा का ये खास अंदाज
पीएम मोदी ने शुक्रवार को हिमा को बधाई देने के बाद आज यानि की शनिवार को उनकी रेस से जुड़ा एक और विडियो शेयर किया. जिसमें उन्होंने कैप्शन में बताया कि हिमा जिस तरह से तिंरगे को ढूंढ रही थीं, उसने उनके दिल को छू लिया.

पीएम ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हिमा की जीत के कभी न भूलने वाले पल.दरअसल हीमा जीतने के बाद जिस तरीके से तिरंगे को खोज रही थीं और फिर राष्ट्रगान के वक्त उनका भावुक होना पीएम के दिल को छू गया. उन्होंने आग लिखा कि इस विडियो को देखकर कौन ऐसा भारतीय होगा जिसकी आंखों में खुशी के आंसू नहीं होंगे.