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सड़कों को बनाने में होगा सिगरेट का इस्तेमाल, पढ़े पूरी खबर

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अगर आप सिगरेट पीने के शौकीन हैं और रोजाना इसका सेवन करते हैं तो ये खबर आपको जरूर पढ़नी चाहिए. दरअसल हाल में हुए एक अध्यन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि सिगरेट के बट्स(सिगरेट के पीछे का हिस्सा) का इस्तेमाल सड़क बनाने के लिए भी किया जा सकता है.
डेक्कन क्रॉनिकल पर छपि रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में हर साल खरबों की संख्या में सिगरेट के बट्स का उत्पादन किया जाता है. जिसमें अधिकांश लोग कचरे के रूप में इसे पर्यायवरण को प्रदुषित करने के लिए इधर उधर फेंक देते हैं. इन बट्स को टूटने में कई साल लग जाते हैं और ये विषैला रासायनिक तत्व बनकर खाड़ी ,नदियां और महासागरों में जाकर जहर घोल देते हैं.
आरएमआईटी विश्वविद्यालय की एक टीम ने अपने अध्यन में यह साबित किया है कि हम सिगरेट बट्टों का उपयोग सड़क बनाने में आसानी से कर सकते हैं. शोध में अन्होंने पाया कि अगर हम इन बट्टों को डामर में मिलाकर सड़कों पर बिछाएंगे तो इससे ट्रैफिक की समस्या को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
इसके अलावा हम सड़कों की तापीय चालकता (थर्मल कंडक्टिविटी) को भी कम करने में सफल रहेंगे.
इसका मतलब है कि यह अविष्कार न केवल पर्यायवरण की समस्या को हल कर सकता है बल्कि शहरों की गर्मी को भी कम करने में उपयोगी रहेगा. क्योंकि वर्तमान में शहरों की अधिकांश सड़कें डामर से ही बनाई जाती है. जो कि काफी गरम पदार्थ है.
इस अध्यन का नेतृत्व आरएमआईटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के वरिष्ठ लेक्चरर डॉ अब्बास मोहाजेरानी कर रहे थे. डॉ मोहाजेरानी ने इस अध्यन के बारे में बताया कि वह सिगरेट के बट्ट के बढ़ रहे कचरों का समाधान खोजने के लिए उत्सुक थे. उन्होंने इसके स्थाई और व्यावहारिक तरीकों को खोजने के लिए कई साल लगा दिए. जिसके बाद उन्होंने इस अविष्कार को सफलता पूर्वक अंजाम दिया.
उन्होंने कहा कि हम अपने शोध से सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रहें रसायनों की संख्या को भी काफी कम कर सकते हैं.
उन्होंने बताया कि इस शोध के बाद सिगरेट के बट्स का इस्तेमाल एक नई प्रणाली बन जाएगा. जिसका इस्तेमाल हम विभिन्न अनुप्रयागों और हल्के समग्र मिश्रण में आसानी से कर सकते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व में प्रति वर्ष लगभग 6 खरब सिगरेट का उत्पादन होता है, जिससे 1.2 मिलियन टन से ज्यादा सिगरेट बट्ट का कचरा निकलता है. मुख्य रूप से विश्व की आबादी बढ़ने के कारण 2025 तक ये आकडें 50 प्रतिशत से अधिक होने की उम्मीद है.