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पैरालंपिक खेलों की बदौलत 30 सालों में पहली बार ट्रेन में बैठा handicapped cricketer

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Handicapped cricketer: असली पहाड़ी वही, जिसने ट्रेन नहीं देखी

Handicapped cricketer: गजब की बात है दोस्तों ! देश भले ही चांद तक पहुंच गया हो, लेकिन आज भी देश में न जाने कितने ऐसे बदनसीब हैं जो ट्रेन में बैठना जिंदगी का ख्वाब समझते हैं.

चलिए आपको एक ऐसे ही 30 वर्षीय राज्य स्तरीय handicapped cricketer की कहानी बताते हैं, जिसे राष्ट्रस्तरीय पैरालंपिक खेलों की बदौलत पहली बार ट्रेन में बैठने का मौका मिला.
 उत्तराखंड की दिव्यांग खिलाड़ियों की टीम जब राष्ट्रीय स्तरीय फिजिकल चैलेंज क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए बड़ौदा रवाना हुई, तो इसी टीम में एक ऐसा भी सदस्य था, जिसे पहली बार ट्रेन में बैठने का मौका मिला.
टीम के handicapped cricketer  महेंद्र सिंह ने खुद बताया कि वो बड़ौदा जाने से पहले कभी भी ट्रेन में नहीं बैठे. ये सफर उनका पहला ट्रेन का सफर है.
महेंद्र से साथी हो गए परेशान
महेंद्र सिंह के साथी अनिल कुमार ने बताया कि ट्रेन में बैठने से पहले तक महेंद्र ने उन्हें पूछ-पूछकर परेशान कर दिया.
महेंन्द्र अपने सभी साथी से पूछते कि ट्रेन के अंदर कैसा फील होता है, तेज चलने के कारण झटके तो नहीं लगते, डर तो नहीं लगेगा, अगर ट्रेन पलट गई तो क्या होगा,खाना पीना तो मिलेगा ना. ऐसे तमाम ट्रेन से जुड़े सवाल पूछ-पूछ कर महेंद्र ने अपने साथी खिलाड़ियों को परेशान कर दिया.
असली पहाड़ी वही, जिसने ट्रेन नहीं देखी
पहाड़ में एक मशहूर कहावत है कि जिसने ट्रेन नहीं देखी, वही असली पहाड़ी है. महेंद्र भी इस कहावत को चरितार्थ करते नजर आते हैं.
कड़ी मेहनत के बाद हुआ टीम में चयन
आपको बता दें कि 30 वर्षीय महेंद्र सिंह उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्र चकराता के रहने वाले हैं. वह पैरालाइसिस रोग से ग्रसित है.
महेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता किसान हैं. और वो भी अपने क्रिकेट खेलने के साथ-साथ पिता की खेतीबाड़ी में हाथ बंटाते हैं.
महेंद्र ने बताया कि वह दो वर्षों से राज्य स्तरीय क्रिकेट टीम में सेलेक्शन के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे. और आखिरकार उन्हें उनकी मेहनत का फल मिल गया.

गौरतलब है कि गुजरात के बड़ौदा में राष्ट्रीय स्तरीय फिजकल चैलेंज क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा हैं. जिसमें 6 राज्यों की दिव्यांग क्रिकेट टीमों ने हिस्सा लिया है.यह सभी खिलाड़ी भी उत्तराखंड की तरफ से हिस्सा लेने के लिए बड़ौदा जा रहे थे. महेंद्र भी इसी उत्तराखंड की टीम के handicapped cricketer हैं.