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होली के रंग में गूगल हुआ सराबोर, डूडल बना दिखाई रंगोत्सव की झलक

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Holi 2018 Google Doodle

Holi 2018 Google Doodle : गूगल ने दी रंग भरी ‘होली’  की बधाई

Holi 2018 Google Doodle : पूरा देश इस समय होली के रंगों में सराबोर हो रखा है, हर तरफ आपको उड़ते गुलाल और रंग भरी पिचकारी से एक दूसरे पर निशाना साधते लोगों की टोली आराम से दिख सकती है.

क्या बच्चे और क्या बूढ़े हर कोई इस पर्व में अपनी ही मस्ती के धुन में खुशियां मनाते दिख रहा होगा. अब तो भारत के बाहर भी कई देशों में होली के रंगीले उत्सव को मनाने की परंपरा शुरू हो चुकी है.
देश और दुनिया में लोगों के बीच बढ़ते होली के क्रेज को देखते हुए आज गूगल ने भी अपने सर्च इंजन को हिंदूओ के इस पावन त्यौहार के लिए समर्पित कर दिया है.
बता दें कि गूगल अक्सर किसी देश और उसकी मान्यताओं के साथ वहां के त्योहार, प्रसिद्ध हस्तियों का सम्मान समय समय पर करता रहता है, इसी सिलसिले में आज उसने होली पर अपना डूडल बनाकर इस पर्व की महत्वता को बखूबी प्रदर्शित किया है.
गूगल की क्रिएटिव टीम ने होली के बधाई संदेश को दर्शाने के लिए मॉडर्न आर्ट के जरिए जो खूबसूरत कलाकारी पेश की है, वह देखने लायक है.
इस चित्र में बहुत से लोगों को होली खेलते हुए दिखाया गया है, किसी के हाथ में पिचकारी है तो कोई बाल्‍टी में रंग भरकर उड़ेल रहा है. कोई ढोल-नगाड़े लेकर अपनी ही मस्‍ती में डूबा है तो कोई उस धुन पर नाचता नजर आ रहा है.
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क्या है पौराणिक मान्यता
होली को लेकर कई तरह की पौराणिक कथाओं का उल्लेख हमारे धार्मिक ग्रंथों में मिलता है. मगर इसमें से जो सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है वो है हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका की कहानी .
दरअसल प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा हुआ करता था जिसे यह वरदान प्राप्त था कि उसे संसार का कोई भी जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य रात, दिन – रात, पृथ्वी, आकाश, घर, या बाहर मार नही सकता.
इस अमर वरदान के बाद वो खुद को परमात्मा मानने लगा, लेकिन उस दौरान भगवान विष्णु को परमात्मा मानने वाले भक्त प्रहलाद हिरण्यकश्यप की औलाद के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिए.
इस बात से नाराज हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रहलाद को मारने के कई प्रयत्न किए जिसमें से एक अपनी बहन होलिका की मदद से आग में जलाकर मारने की योजना भी थी, क्योंकी उसकी बहन को अग्नि से कभी ना जलने का वरदान प्राप्त था .
होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर आग में जा बैठी लेकिन हुआ यूं कि होलिका ही आग में जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद बच गए.
इसके बाद वहां के प्रजावासियों ने अगले दिन एक दूसरे को रंग लगाकर अपनी खुशी को एक उत्सव के रूप में मनाया तभी से हम लोगों के बीच होली का त्यौहार मनाने की परंपरा की शुरूआत हुई.