Home देश कोटद्वार- 52 वर्षों से वोट बैंक बनकर रह गई है मद्रासी बस्ती

कोटद्वार- 52 वर्षों से वोट बैंक बनकर रह गई है मद्रासी बस्ती

SHARE
फोटो साभार-बोर्गन
फोटो साभार-बोर्गन
उत्तराखंड के कोटद्वार में बसी मद्रासी बस्ती देश में वोट बैंक की राजनीति की असलियत बयां कर रही है. बस्ती में रहने वोले लोगों की जिंदगी  कूड़े के ढेर में  सिमटकर रह गई है.
जब भी इस जिले में कोई चुनाव होता है तो तमाम राजनीतिक दल बस्ती के लोगों को लुभाने के लिए चले आते हैं, लेकिन चुनाव गुजर जाने के बाद कोई इन मासूमों की तरफ मुड़कर भी नहीं देखता.
हाल ही में 15 अगस्त 2017 को हमने देश की आजादी की 71वी वर्षगांठ मनाई है, लेकिन मद्रासी बस्ती इस बात की गवाह है कि हमारे देश में आज भी कुछ वर्ग सामाजिक, आर्थिक एवं न्यायिक स्वतंत्रता से वंचित हैं.
इस बस्ती में रहने वाले अधिकांश लोग कूड़ा उठाने का काम करते है. जिससे इनके लिए किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो जाता है.
राशन कार्ड तक नहीं बना
मद्रासी बस्ती की दुर्दशा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बस्ती में रह रहे किसी भी व्यक्ति का  राशन कार्ड नहीं बनाया गया है. जिसके कारण बस्ती के लोग सरकारी राशन तक नहीं ले पाते हैं . यहां तक की गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने के बावजूद इन लोगों को अभी तक सरकारी योजना के एक रुपये तक का लाभ नहीं मिला पाया है.
हिंदी नहीं, लेकिन अंग्रेजी जानते हैं
भले ही मद्रासी बस्ती के लोग कूड़ा उठाते हों, लेकिन वे अंग्रेजी में भी बात करते हैं. दरअसल, बस्ती के लोग तमिलनाडु के मूल निवासी हैं. तमिलनाडु में अंग्रेजी सामान्य भाषा होती है और हिंदी भाषा का उपयोग वहां ना के बराबर किया जाता है. इसलिए वे आपस में तमिल भाषा में ही बात करते हैं.जबकि बाहर के लोगों से संवाद करने के लिए वो अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं .
मद्रासी बस्ती का इतिहास
बस्ती के सबसे अधिक उम्र के 63 वर्षीय कामराज ने बताया कि हम यहां तकरीबन  52 वर्ष से रह रहे हैं. उन्होंने बताया कि बस्ती के सभी लोग तमिलनाडु के मूल निवासी हैं. 1965 में तमिलनाडु में तूफाना आया था तो 10-15 परिवार काम की तलाश में उत्तराखंड आ गए थे.  इसके बाद हम सभी यहीं बस गए.
 
कांग्रेस हो या भाजपा, दोनों  बराबर दोषी
45 वर्ष सिलीगुड़ी बताती हैं कि जब उत्तराखंड राज्य उत्तर प्रदेश से अलग हुआ तो उत्तराखंड में चुनाव होने के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए बस्ती के लोगों का वोटर आईडी कार्ड बनवाया था.
 इसके बाद जब कांग्रेस ने कुछ नहीं किया तो अगले विस चुनाव में भाजपा ने उनसे विकास के वायदे किए, लेकिन उन्होंने भी चुनाव जीतने के बाद  मुड़कर नहीं देखा.