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Mobile Network In Disaster : आपदा के समय अब मोबाइल और इंटरनेट तेजी से करेंगे काम

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Mobile Network In Disaster
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Mobile Network In Disaster : उत्तराखंड त्रासदी से लिया सबक

Mobile Network In Disaster : आपदा में लोगों के बीच मोबाइल कनेक्टिविटी में आने वाली दिक्कतों को जल्द ही खत्म करने के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) एक नए नेटवर्क की शुरूआत करने जा रहा है.

अक्सर देखा जाता है कि भूकंप,बाढ़ जैसी किसी बड़ी आपदा के दौरान वहां की मोबाइल सर्विस पूरी तरह ठप हो जाती है, जिससे वहां फंसे लोगों की कोई खोज खबर नहीं मिल पाती है.
इस बारे में ट्राई पब्लिक प्रोटेक्शन ऐंड डिजास्टर रिलीफ (पीडीपीआर) कम्यूनिकेशन नेटवर्क के जरिए इमरजेंसी में अधिक से अधिक मदद और आपात संदेश पहुंचाने के लिए नीति बना रही है. इस प्रक्रिया को ‘रिस्पॉन्स ऐंड रिकवरी ड्यूरिंग इमर्जेंसी‘ नाम दिया गया है
दूरसंचार मंत्रालय के मुताबिक इस नीति में इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि आपादा की स्थिति में किन तरीकों से वहां फंसे लोगों को नेटवर्क की उपल्ब्धता कराई जाएगी, और इसकी शर्त क्या होगी.
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मंत्रालय के अनुसार इस बारे में सभी टेलीकॉम कंपनियों और एकस्पर्टस को 4 दिसंबर तक अपनी राय देने को कहा गया है.
सरकार के अनुसार अगर ये टेलीकॉम कंपनियां इस नीति के लिए तैयार होती हैं तो उनके लिए अलग से स्पेकट्रम भी तय किया जा सकता है. इसके लिए गूगल और अन्य कंपनियों से भी सहयोग मांगा गया है.
क्या है ट्राई की योजना
मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार इमरजेंसी के वक्त एक टोल-फ्री नंबर शुरू किया जाएगा, जिस पर किसी भी ऑपरेटर की सर्विस के साथ फोन किया जा सके. ये सर्विस हर प्रकार की आपदा के समय सिर्फ 10 मिनट के अंदर ही शुरू कर दी जाएगी.
इसके तहत सभी नेटवर्क आपस में जुड़े रहेंगे, ताकि उपभोक्ताओं को आपस में बात करने में सहूलियत मिल सके. इसके साथ ही उनके लिए इंटरनेट नेटवर्क भी सबसे तेज गति से उपलब्ध कराई जाएगी.
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उत्तराखंड त्रासदी से लिया सबक
गौरतलब है कि 2013 में आई उत्तराखंड त्रासदी में राहत कार्य के दौरान मोबाइल कनेक्टिविटी एक बड़ी दिक्कत बनकर उभरी थी. आपदा में फंसे हजारों लोगों के पास फोन होने के बावजूद भी वो अपने परिजनों या राहतकर्मियों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे.
इसके बाद सरकार की और से पहली बार इस दिशा में व्यापक नीति बनाने का फैसला किया गया था. आपको बता दें कि फिलहाल अभी भारत में किसी भी टेलिकॉम कंपनी के पास अपना खुद का कोई इमरजेंसी सिस्टम नहीं है.

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