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देश की बेटियों के लिए NRI दुल्हे बन रहे काल, हर 8 घंटे में मांगती है अपने घरवालों से मदद

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NRI Marriage In India : बेटी की खुशी के लिए लोग आंख मूंदकर विदेश में रहने वाले लड़कों पर कर रहे भरोसा

NRI Marriage In India : दुनिया के हर मां बाप की यह इच्छा रहती है कि उसकी बेटी हमेशा खुश रहे. इसके लिए वो अपनी बेटी के लालन पोषण से लेकर उसकी शादी तक उसे दी जाने वाली सुख सुविधाओं में किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ते हैं.

यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में लोगों के अंदर अपनी बेटियों की शादी को लेकर   एनआरआई(NRI) दूल्हें की मांग बढ़ी है.इसके पीछे की उनकी प्रमुख सोच यह रहती है कि विदेशों में जाकर उनकी बेटी की जिंदगी बेहद सुकून भरी हो जाएगी.
वहां उसको किसी तरह की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा वो वहां हर उस चीज का लुत्फ उठा सकती है जो उसे देश में कभी नहीं मिल सकता.
यही सब सोचकर देश के ज्यादातर पैरेंट्स अपनी बेटी के लिए विदेशी लड़कों पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं और अपनी बेटी को उसके हवाले हमेशा के लिए कर देते हैं.
मगर इसके बाद क्या होता है उसका हाल आप विदेश मंत्रालय के इस ताजा आकड़ों से लगा सकते हैं.
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दरअसल विदेश मंत्रालय मे एनआरआई शादियों को लेकर एक चौकानें वाले आकड़े प्रस्तुत किए हैं जिसमें बताया गया है कि एनआरआई पति से ब्याही एक बेटी हर आठ घंटे में अपने पैरेंट्स से विभिन्न कारणो को लेकर मदद मांगने के लिए फोन करती है.
इस रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर बेटियां पति द्वारा छोड़ दिया जाना, बुरा बर्ताव करना और शारीरिक प्रताड़ना देने जैसे कारणों का उल्लेख अपने घरवालों से करती हैं.
बता दें कि पिछले साल 1 जनवरी 2017 से लेकर 30 नवंबर 2017 के बीच विदेश मंत्रालयों को करीब ऐसी 3,328 शिकायते मिली थी जिसमें हर बेटी ने दिन ने तीन बार और रात में एक बार अपने पैरेंट्स को फोन करके खुद पर हो रहे अत्याचार से अवगत कराते हुए मदद मांगी थी.
टीओआई पर रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से ज्यादातर लड़कियां पंजाब, गुजरात और आंध्र-तेलंगाना की हैं. वहीं सार्वजनिक सहयोग और बाल विकास की एक साल पहले आई रिपोर्ट ने भी इन कारणों की पुष्टि की है.
इस पूरे मामले में पूर्व में अमेरिका में भारतीय दूतावास में काम कर चुकी आरती राव कहती हैं कि हमारे देश में आज भी दहेज प्रथा काफी मजबूत है इसी वजह से लड़के वाले मोटी रकम की चाह में अपनी बेटे की शादी भारत की लड़कियों से कर देते हैं.
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वहीं दूसरी तरफ लड़के भी अपने पैरेंट्स को खुश करने के लिए भारत आते हैं और अपने घरवालों के हिसाब से शादी कर लेते हैं. मगर उनके अंदर कहीं भी अपनी पत्नियों के साथ रहने की कोई इच्छा नहीं रहती है.
पहले तो वो अपनी पत्नीयों को अपने साथ विदेश में रखने के लिए तैयार नहीं होता और अगर किसी दबाव में उन्हें ऐसा करना भी पड़े तो वो उन्हें वहां ले जाकर तरह से तरह से प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं.
गौरतलब है कि भारत के तमाम राज्यों में स्थित दूतावास को ऐसी महिलाओं की शिकायतें मिलती हैं. इसके अलावा मंत्रालय ने खासकर ऐसी महिलाओं की शिकायतों को सुनने के लिए एक पोर्टल भी बनाया है जिसका नाम मदद(MADAD) रखा गया है.