Home देश उत्तराखंड दौरे पर president ramnath kovind को देखकर लोगों ने कहा, क्या...

उत्तराखंड दौरे पर president ramnath kovind को देखकर लोगों ने कहा, क्या राष्ट्रपति ऐसा भी होता है?

SHARE
President house
राष्ट्रपति भवन

President Ramnath Kovind: राष्ट्रपति ने खुद उठाई अटैची और बिना छाते के किया दौरा

नाम- रामनाथ कोविंद पद- भारत का राष्ट्रपति ,लेकिन व्यवहार बिल्कुल आम आदमी की तरह. शनिवार को इसकी झलक मिली president ramnath kovind के उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे के दौरान.

उत्तराखंड के पूरे दौरे में president ramnath kovind  का अंदाज अभी तक के राष्ट्रपति से बिल्कुल जुदा था. राष्ट्रपति हर किसी के साथ आम आदमी की तरह हाथ मिलाते और बात करते नजर आए.
राष्ट्रपति का यह अंदाज देखकर न सिर्फ जनप्रतिनिधियों को ताज्जुब हुआ, बल्कि सुरक्षा में लगे पुलिस के जवान व जनता को भी हैरानी हुई. हर कोई उनकी सरलता का कायल हो गया. जिसने भी उन्हें करीब से देखा सब ने एक ही बात कही  कि क्या कोई ऐसा भी राष्ट्रपति होता है.
 खुद हाथ में उठाया अपना बैग और छाता
President ramnath kovind जब देहरादून पहुंचे तो उनके पास एक छोटी अटैची थी. वह कार से उतरे तो अटैची भी हाथ में पकड़कर चलने लगे. यह देखकर हर कोई दंग रह गया. इस पर उनके सुरक्षकर्मियों ने उनसे अटैची देने को कहा, मगर उन्होंने उसे मना कर दिया.
पुलिस का जवान भीग सकता है तो हम क्यों नहीं
राष्ट्रपति का उत्तराखंड दौरा बारिश भरा रहा. राष्ट्रपति जौलीग्रांट एयरपोर्ट से सड़क मार्ग के जरिए देहरादून पहुंचे. इस दौरान बारिश होने के कारण वो पूरी तरह भीग चुके थे मगर फिर भी वो अपने तय कार्यक्रम में शामिल हुए.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं पूरी तरह भीग चुका हूं लेकिन मैं फिर भी यहां आपके सामने खड़ा हुं. क्योंकि मैनें सोचा जब हमारे पुलिस के जवान हमारे लिए भीगते हुए मेरे इंतजार में खड़े हैं, तो हम भी क्यों नहीं भीग सकते.

पैदल तय की बदरी-केदारनाथ की दूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जब रविवार को केदारधाम और बदरीनाथ पहुंचे. तो उन्होंने मुख्य मार्ग से मंदिर तक पहुंचने के लिए किसी सेवा का उपयोग नहीं किया. वह पैदल चलते हुए आम आदमी की तरह मंदिर में पहुंचे और भगवान के दर्शन किए.
बेहद सामान्य परिवार से हैं राष्ट्रपति कोविंद
देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्म कानपुर देहात के पारौख गांव में एक दलित परिवार में हुआ. घर में उनके पांच भाई व दो बहनें हैं थी जिसमें सबसे छोटे वह हैं.
 रामनाथ कोविंद ने चौथी तक की पढ़ाई अपने गांव में कि, फिर वो पांचवी कक्षा में आगे पढ़ने के लिए कानपुर स्थित जूनियर हाई स्कूल में एडमिशन ले लिया था. जो उनके गांव से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर था.
रामनाथ कोविंद को शुरू से ही पढ़ाई से खास लगाव रहा है. तभी तो वह रोजाना पैदल ही 8 किलोमीटर की दूरी तय करके अपने स्कूल जाते थे.
इंटरमीडियट की पढाई करने के बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी कर हाईकोर्ट में अपने प्रैक्टिस की.
इसके बाद अटल बिहारी सरकार में वो दो साल तक केंद्र सरकार के वकील के रूप में भी कार्य किया. और फिर 2015 में उन्हें बिहार के राज्यपाल का दायित्व दिया गया.