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Railway Going Paperless: रेलवे ने बंद की ट्रेनों के बाहर लगने वाली आरक्षण चार्ट की सुविधा

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Railway Going Paperless
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Railway Going Paperless: चुनिंदा स्टेशनों से की जाएगी शुरूआत

Railway Going Paperless: अगर आपको भी ट्रेन की आरक्षित बोगी में चढ़ने से पहले कोच के बाहर लगे आरक्षण चार्ट देखने की आदत है तो इसे छोड़ दिजिए.

क्योंकि अब रेलवे की तरफ से यात्रियों को मिलने वाली ये सुविधा बंद होने जा रही है.
दरअसल रेल मंत्रालय ने पेपर बचाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें वो इस सुविधा को खत्म करने जा रही है.
फिलहाल रेलवे इसे एक प्रयोग के तौर पर कुछ चुनिंदा स्टेशनों से चलने वाली ट्रेनों पर तीन महीने के लिए ही लागू करने जा रही है. जिसके सफल परिणाम आने के बाद इसे हमेशा के लिए लागू कर दिया जाएगा.
इस संबंध में मंत्रालय ने अपने सभी चयनित रेलवे जोन को पत्र लिखकर इसे तत्काल लागू करने को कहा है.
चयनित स्टेशन
नई दिल्ली, हज़रत निजामुद्दीन, मुंबई सेंट्रल, मुंबई छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, चेन्नई सेंट्रल, हावड़ा,और सियालदह से चलने वाली सभी ट्रेनों मे तीन महीनों तक आरक्षण चार्ट नहीं लगाया जाएगा.
कहां से आया विचार
इस कदम के पीछे दक्षिण पश्चिमी रेलवे के बेंगलुरु डिवीजन की शुरू की गई ग्रीन पहल है.
8 नवंबर 2016 को बेंगलुरू डिविजन ने बेंगलुरु सिटी और यशवंतपुर रेलवे स्टेशनों से चलने वाली सभी रेलगाड़ियों के आरक्षित डिब्बों पर चार्ट लगाने पर रोक लगा दी थी.
इस पहल से रेलवे के इस मंडल ने कागज की बचत करके 60 लाख रुपये विभाग के बचाए.
जिसके बाद मंडल के सीनियर डिवीजनल कॉमर्शियल मैनेजर श्रीधर मूर्ति ने रेलवे मंत्रालय को आरक्षित डिब्बों पर चार्ट लगाने की सुविधा को खत्म करने का सुझाव दिया था. जिस पर विचार करते हुए मंत्रालय के द्वारा ये फैसला लिया गया.
क्यों नहीं है अब चार्ट की जरूरत
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रेनों पर चार्ट लगाने की जरूरत अब इसलिए नहीं है क्योंकि यात्रियों को एसएमएस के जरिये पहले ही उनके कोच और बर्थ-सीट की सूचना मोबाइल पर दे दी जाती है.
वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों की भी सीट कन्फर्म होने पर रेलवे बोर्ड एसएमएस से बर्थ नंबर भेज देता है.
अगर फिर भी किसी यात्री को परेशानी हो तो वह हेल्पलाइन नंबर 139 पर अपनी सीट की कन्फरमेशन से जुड़ी जानकारी जान सकता है.
वहीं रेलवे का मानना है कि कागज के खर्च के अलावा इसे चिपकाने के लिए फालतू स्टाफ भी लगाना पड़ता है. इस सुविधा को बंद करने के बाद इस स्टाफ का उपयोग अन्य जरूरी कार्यो में किया जा सकता है.