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भारत के अंदर 2 साल में 26600 छात्रों ने करी आत्महत्या, संसद में पेश हुए आकड़े

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Students Suicide India
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Students Suicide India : इस मामले में महाराष्ट्र का पहला स्थान

Students Suicide India : पढ़ाई लिखाई करने वाले विद्यार्थियों के बीच आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने काफी चौंकाने वाले आकड़ें पेश किए हैं.

दरअसल केंद्र सरकार में गृहराज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने बीते बुधवार को संसद में एक प्रश्न के लिखित जवाब में छात्र-छात्राओं के द्वारा की जाने वाली आत्महत्या को लेकर नए आकड़े पेश किए.
इसमें उन्होंने संसद को बताया कि पिछले 2 साल में 26600 छात्रों ने किसी कारण वश खुदखुशी कर ली है. बता दें कि सरकार ने साल 2014 से 2016 के बीच हुई आत्महत्याओं के आकड़े संसद में बताए हैं. वहीं 2007 से 2017 के बीच के छात्रों के आत्महत्या के 75000 मामले दर्ज हुए थे .
केंद्रीय राज्यमंत्री ने राज्यसभा में दिए गए अपने जवाब में बताया कि साल 2016 में 9,474 छात्र, 2015 में 8,934 और साल 2014 में 8,068 छात्र- छात्राओं ने आत्महत्या करी है.
वहीं इन आकड़ों के देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में साल 2014 के बाद से विद्यार्थियों के आत्महताया के मामले में कितनी तेजी से बढ़ोतरी हुई है.
इस मामले में महाराष्ट्र का पहला स्थान
श्री अहीर ने बताया कि अगर साल 2016 के आकड़ों पर नजर डाले तो महाराष्ट्र में आत्महत्या के सबसे ज्यादा 1,350 मामले दर्ज किए गए.
वहीं पश्चिम बंगाल में ऐसे 1,147 मामले, तमिलनाडु में 981 मामले और मध्य प्रदेश में 838 मामले दर्ज हुए हैं. जबकि अगर साल 2015 की बात करें तो महाराष्ट्र में आत्महत्या के 1,230 मामले, तमिलनाडु में 955 मामले, छत्तीसगढ़ में 730 मामले और पश्चिम बंगाल में 676 मामले दर्ज हुए हैं.
गौरतलब है कि यह संख्या उन आत्महत्याओं की है जो कानूनी लिखा पढ़ी में दर्ज हैं वैसे यह आकड़े और भी बड़े हो सकते हैं.
जानकारों की माने तो इनमें से ज्यादा छात्र – छात्राएं पढ़ाई में सफल नो हो पाने, प्रेम संबंध या फिर किसी मानसिक अवसाद के कारण आत्महत्या को अपना अंतिम विकल्प चुना है.