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Supreme Court On Abortion : बच्चे का गर्भपात कराने के लिए नहीं लेनी होगी पति की मंजूरी

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Supreme Court On Abortion
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Supreme Court On Abortion : गर्भपात महिला का खुद का निर्णय

Supreme Court On Abortion : महिलाओं के द्वारा खुद से कराए जाने वाले गर्भपात के हक में देश के उच्च न्यायालय नें एक अहम फैसला सुनाया है.

इस फैसले के बाद अब देश में किसी भी महिला को अपना गर्भपात कराने के लिए पति की इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
दरअसल एक तलाकशुदा की तरफ से दायर याचिका के संबंध में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी बालिग महिला को बच्चे को जन्म देने या फिर गर्भपात कराने का फैसला लेने का अधिकार है.
ऐसा जरूरी नहीं है कि वो अपने गर्भपात कराने का फैसला पति या परिजनों के मंजूरी के बाद ही ले.

आपको बता दें कि पत्नी से अलग हो चुके पति ने अपनी याचिका में पूर्व पत्नी उसके मात-पिता, भाई और दो डॉक्टरों पर अवैध गर्भपात कराने का आरोप लगाया था.

याचिका में कहा गया था कि उस समय उस बच्चे का बाप वो था मगर उसकी सहमति के बिना ही उसकी पूर्व पत्नी ने बच्चे का गर्भपात करा दिया.
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क्या है पूरा मामला
जिस व्यक्ति ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था उसका विवाह 1995 में पंजाब में हुआ था.
लेकिन दोनों के बीच रिश्तों में खटास आने की वजह से साल 1999 से पत्नी अपने एक बेटे के साथ चंडीगढ़ स्थित  मायके में रहने लगी थी.
कुछ साल गुजरने के बाद दोनों ने आपस में सुलह कर  नवंबर 2002 से फिर से साथ रहना शुरू कर दिया था.
मगर 2003 में दोनों के बीच एक बार फिर से तनाव हुआ और दोनों ने कोर्ट में जाकर हमेशा के लिए एक दूसरे से तलाक ले लिया.
लेकिन इस दौरान महिला गर्भवती हो गई थी, मगर तलाक होने की वजह से वो अपने पेट में पल रहे बच्चे का गर्भपात कराना चाहती थी. जिसपर उसके पूर्व पति ने विरोध जताया.
लेकिन महिला अपना मन बना चुकी थी और अपने परिवार से संपर्क कर उसने अस्पताल में जाकर बच्चे का गर्भपात करा दिया.
इस पूरे मामले के बाद पति ने कोर्ट में महिला के माता-पिता, उसके भाई और डॉक्टर्स को अवैध गर्भपात कराने का आरोपी बनाते हुए अदालत में केस कर दिया.
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हाईकोर्ट भी ठुकरा चुका था याचिका
गौरतलब है कि इससे पहले  पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भी गर्भपात कराने के निर्णय को महिला के ऊपर छोड़ते हुए याचिका खारीज कर दिया था.
इस मामले में उस समय हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर पति-पत्नी के बीच तनाव है और रिश्ते में टकराव आ गया है तो बच्चे को जन्म देना है या नहीं यह पूरी तरह से पत्नी का अधिकार क्षेत्र है.
कोर्ट ने कहा कि वो महिला पेट में पलने वाले बच्चे की मां है , आखिर कोई दूसरा कैसे उसके फैसले पर हस्तक्षेप कर सकता है.
वहीं आज सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश दीपक मिश्रा नें भी अपने फैसले में भी यही बात दोहराई.
उन्होंने कहा कि इस देश में मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला को भी यह अधिकार है कि वह अपना गर्भपात बिना किसी की अनुमति के करा सकती है.

 

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