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भ्रष्टाचार की सूची में लुढ़का भारत, मगर प्रेस की आजादी में छवि बनी खराब

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Transparency International Report 2017
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Transparency International Report 2017 : पिछले साल मिला था 79वां स्थान

Transparency International Report 2017 : ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने हाल ही में देश के अंदर होने वाले भ्रष्टाचार पर आधारित करप्शन इंडेक्स 2017 की रिपोर्ट जारी कर दी है.

इस रिपोर्ट में 180 देशों को सार्वजनिक क्षेत्र में होने वाले भ्रष्टाचार और वहां की प्रेस स्वतंत्रता के अनुसार रैंक में रखा गया है.जिसमें भारत को 81वां स्थान मिला है.
आपको बता दें कि 2016 में भारत 176 देशों के बीच 79 वें स्थान पर था. जबकि 2015 में भारत का 76वां स्थान था. वहीं बात करें भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की तो इस सूची में उसका स्थान 117वां है.
हालांकि 2012-13 से भारत में भ्रष्टाचार का स्कोर लगातार बेहतर रहा है, लेकिन इस स्कोर में महज 2 अंकों का ही इजाफा देखने को मिल रहा है.
ताजा रैंकिंग में न्यूजीलैंड और डेनमार्क क्रमशः 89 और 88 के स्कोर के साथ सर्वोच्च स्थान पर रहे. वहीं दूसरी ओर सीरिया, दक्षिण सूडान और सोमालिया को क्रमशः 14, 12 और 9 के स्कोर के साथ सबसे कम स्थान मिला.
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भारत के पड़ोसी देशों में 41 अंकों के साथ चीन को 77 वें स्थान पर रखा गया, जबकि ब्राजील को 37 के स्कोर के साथ 96 वें स्थान पर रखा गया था और रूस 135 वें स्थान पर था.
आपको बता दें कि इस रिपोर्ट पर ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि पूरे क्षेत्र (एशिया प्रशांत) के कुछ देशों में, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, विपक्षी नेताओं, कानून बनाने और निगरानी रखने वाली एजेंसियों के कर्मचारियों को भी धमकी दी जाती है और सबसे खराब मामलों में यहां तक ​​कि उनकी हत्या भी करा दी जाती है.
ट्रांसपेरेंसी के अनुसार फिलीपींस, भारत और मालदीव इस क्षेत्र में सबसे खराब देश बनकर उभरे हैं. इन देशों में भ्रष्टाचार और सीमित प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारों की मौतें सबसे ज्यादा होती हैं.
गौरतलब है कि सूचकांक तैयार करने के लिए देशों को विभिन्न कसौटियों पर 0 से 100 अंक के बीच अंक दिए जाते हैं. सबसे कम अंक पाने वाला देश भ्रष्टाचार व्याप्त होने का संकेत माना जाता है.