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21वीं सदी में भी वहम का इलाज नहीं, भूत-प्रेत भगाने के लिए निदेशालय में हो रहा यज्ञ

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भूत-प्रेत
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21वीं सदी में अंधविश्वास के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन भला मन के वहम का क्या किया जा सकता है.
भले ही आज देश मंगल पर पहुंच चुका हो, मगर अभी देश के वैज्ञानिकों ने इतनी भी तरक्की नहीं की है कि वे मन के वहम की दवा इजात कर सकें.
इन दिनों उत्तराखंड युवा कल्याण निदेशालय के अधिकारी भी इसी वहम की चपेट में हैं. ताज्जुब करने वाली बात यह है कि अधिकारियों को लगता है कि निदेशालय भवन में कोई भूत-प्रेत का साया रहता है.
वहां काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का मानना है कि इस भूत-प्रेत की वजह से भवन में हमेशा कुछ न कुछ अशुभ होता ही रहता है.
इसी वहम को दूर करने के लिए वे निदेशालय भवन में शुक्रवार से तीन दिन का शुध्दि यज्ञ करा रहे हैं.
हालांकि वो बात अलग है कि अधिकारी खुले तौर पर अपने इस भूत-प्रेत वाले वहम को सार्वजनिक करने से बच रहे हैं.

तांत्रिक से मिट्टी की भी जांच कराई

विभागीय सूत्रों ने दबी जुबान में बताया कि अधिकारी व कर्मचारी निदेशालय भवन को शुभ नहीं मानते. इसके लिए उन्होंने महीनों पहले एक तांत्रिक से मिट्टी की भी जांच कराई थी. ताकि पता चल सके कि यहां कोई बुरा साया तो नहीं है.

क्या है वहम का कारण

ऐसा कहते हैं कि देहरादून के तपोवन रोड में जिस भूमि में युवा कल्याण निदेशालय बना हुआ है, वहां दशकों पहले कब्रिस्तान हुआ करता था. जिसकी वजह से यहां काम करने वाले सभी स्टॉफ मानते हैं कि यहां कोई बुरा साया जरूर है.
निदेशालय में काम करने वालों के मन में वहम इतनी अंदर तक पसर चुका है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी के बीमार पड़ने पर उन्हें लगता है कि यह उसी भूत-प्रेत के द्वारा किया गया है. पिछले दिनों निदेशालय में कार्यरत दो कर्मचारियों के असामयिक निधन को भी वे इसी का नतीजा मानते हैं.
निदेशालय में यज्ञ कराना हास्यास्पद
शुक्रवार से निदेशालय में तीन दिवसीय शुध्दि यज्ञ चल रहा है. अधिकारी यज्ञ को सामान्य पूजा पाठ का हिस्सा बता रहे हैं. लेकिन सरकारी कार्यालय में तीन दिन तक यज्ञ का आयोजन आश्चर्यचकित करने वाला है.
वहीं विभाग का कोई भी कर्मचारी या अधिकारी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं.
खैर छोड़िए, हम तो यही उम्मीद करते हैं उत्तराखंड युवा कल्याण निदेशालय का यह यज्ञ सफल रहे