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पीरियड्स में सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता को लेकर सरकारें हुई जागरूक, गोआ और महाराष्ट्र में दिखा एक्शन

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Awareness About Sanitary Napkins
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Awareness About Sanitary Napkins : महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए गोवा सरकार ने उठाया बेहतर कदम…

Awareness About Sanitary Napkins : महिलाओं के मासिक धर्म में इस्तेमाल होने वाले सेनेटरी नैपकिन की जरूरी उपलब्धता को लेकर अब देश की सरकारों के अंदर जागरूकता देखने को मिल रही है.

हाल ही में महिला कर्मचारीओं के लिए मासिक धर्म और उससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव में सुधार के लिए गोवा सरकार ने सभी कंसट्रक्शन साइट्स और सरकारी कार्यालय में सैनेटरी पैड मशीन लगाने के आदेश दिए हैं.
गोवा की मनोहर पार्रिकर सरकार ने पेश किए अपने बजट 2018-19 में इस सुविधा का प्रावधान करते हुए इसे  अप्रैल से शुरू करने की बात कही है.
आपको बता दें कि यह फैसला मजदूर एवं रोजगार मंत्री रोहन खंवटे ने महिला कर्मचारियों के मासिक धर्म में इस्तेमाल होने वाले नैपकिन के आसानी से उपलब्धता को सुनिश्चचित करने के लिए बोर्ड की बैठक में लिया.
रोहन खंवटे ने बैठक में बताया कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी औद्योगिक क्षेत्र, निर्माण स्थलों और शिक्षा के संस्थानों पर सैनिटरी पैड वितरण मशीन स्थापित की जाएगी.
इस बारे में खंवटे का कहना है कि लोगों के अंदर महिलाओं के होने वाले प्राकृतिक मासिक धर्म की स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार ने यह बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है.
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पीरियड्स में घास, सूखे पत्ते इस्तेमाल करती हैं महिलाएं
गौरतलब है कि पूरी दुनिया में 130 करोड़ की महिला आबादी है जिसमें से भारत में ही औसतन 35.5 करोड़ महिलाएं और किशोर बालिकाएं मासिक धर्म से गुजरती हैं.
मगर हैरान करने वाली बात है कि इनमें से 70 प्रतिशत परिवार नियमित तौर पर अपने घर की महिलाओं के लिए सैनेटरी पैड खरीदने में असमर्थ रहते हैं.
आकड़ों की माने तो महिलाओं की जनसंख्या में दूसरे स्थान पर रहने वाले भारत में 88 प्रतिशत महिलाएं आज भी मासिक धर्म के दौरान पुराने कपड़े, सूखे पत्ते, लत्ते, सूखी घास, बुरादा और राख का इस्तेमाल करती हैं.
इसी का परिणाम है कि आज देश में 23 फीसदी महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की शिकार हैं और 27 फीसदी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण पाए गए हैं .
यही नहीं महिलाओं की कई अन्य गंभीर बीमारियों और संक्रमण का कारण भी मासिक धर्म में अस्वच्छता और जागरुकता में कमी होना पाया गया है.
जाहिर है कि कई महिलाएं और किशोर लड़कियां समाज के निम्नतम भाग से हैं, जहां गरीबी और पुरानी प्रथाओं के चलते माहवारी में स्वच्छता और स्वास्थ्य पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता. जिसके कारण वहां के परिणाम बेहद दयनीय और भयानक होते हैं.
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सरकारों ने शुरू की कोशिश
बहरहाल, राज्य सरकार के इस कदम से कामकाजी महिलाओं के लिए बेहतर स्वच्छता की स्थिति सुनिश्चित हो सकेगी.
बता दें कि यह सैनेटरी पैड वितरण मशीन न केवल महिलाओं को ज़रूरत के समय में मदद करेगी बल्कि उन्हें सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करने के बारे में भी जानकारी देगी.
वहीं गोआ की ही तर्ज पर हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने भी गांव के सभी पंचायतों में महिलाओं और किशोरियों के लिए सैनिटरी नैपकिन 5 रुपए में उपलब्ध कराने का फैसला किया है.

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