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जानिए एशिया की सबसे बड़ी बाणसागर नहर परियोजना से जुड़ी कुछ मुख्य बातें

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Bansagar Canal Project
PC - PIB

Bansagar Canal Project : लाखों किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

Bansagar Canal Project : एक बार फिर पीएम मोदी ने यूपी के किसानों को बड़ा तोहफा दे दिया है, इस बार उन्होंने वो कर दिखाया है जो पिछले 21 सालों से सिर्फ सुनने को मिल रहा था.

जी हां, हम बात कर रहे हैं एशिया की सबसे बड़ी बाणसागर नहर परियोजना की, जिसको पीएम मोदी ने बीते रविवार यानि 15 जुलाई को मिर्जापुर के चनईपुर गांव से हरी झंडी दिखाई है.
ज्ञात हो इस प्रोजेक्ट की आधारशिला 2006 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी. हालांकि इस पार काम शुरू करने की योजना तो 1977 से ही बनने लगी थी.
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 किसानों को मिलेगा फायदा  
बता दें कि इस बाँध के शुरू होने से प्रदेश के दो बड़े जिलों मिर्जापुर और इलाहाबाद के असिंचित क्षेत्रों के 1.70 लाख किसानों बेहद फायदा होगा.
जब यह योजना शुरू की गई थी तो इसका मकसद  50 फीसदी पानी मध्यप्रदेश को, और 25-25 प्रतिशत पानी यूपी, बिहार को देने की योजना बनी थी. यही वजह थी की प्रोजेक्ट में आने वाले खर्ज की 50 फीसदी राशि मध्यप्रदेश सरकार को वहन करना था.
लेकिन जैसे की भारतीय राजनीति में होता आया है सरकार बदलने के कारण इसको पूरी तरह लागू करने में काफी समय लग गया .
ज्ञात हो इस बाँध को बनाने में करीब 3500 करोड़ का खर्च आया है जिसका आधा हिस्सा मध्यप्रदेश सकरार और बाकि के 50 फीसदी यूपी और बिहार द्वारा मिलकर दिया गया है.

 39 साल से तैयार था बांध का प्लान

दरअसल साल 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने इस परियोजना के लिए 1977 के मूल्य के आधार पर  322.30 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई थी.
तब सोचा गया था कि अगले 10 सालों  योजना को पूरा किया जायेगा लेकिन ऐसा हो नहीं सका, इसके पीछे का कारण वित्तीय संसाधनों की सीमित उपलब्धता और सहभागिता के अनुसार अंशदान का भुगतान समय से न होना बताया जाता है.
सिंचाई मंत्री के अनुसार  इस परियोजना से मिर्जापुर में 75,309 हेक्टेयर जमीन और इलाहाबाद में 74,803 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और करीब  1,70,000 किसान इसका सीधा  लाभ उठा सकेंगे.

जानिए इस बांध की कुछ खासियत

 . मुख्य बांध की कुल लंबाई 1020 मीटर है
. 671.72 मीटर  पक्का बांध है
. 50×60 फुट के रेडियल क्रेस्ट गेट द्वारा की जायेगी पानी की निकासी
. 170 किमी टनल व नहर के माध्यम से बना है ये ऐतिहासिक बांध
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क्यों है इस छेत्र में बाँध की ज़रूरत ? 
इसका  सीधा सा जवाब है कि सिंचाई सुविधा के मामले में यह इलाका काफी पीछे है जिसके चलते हर साल सूखे के हालत पैदा होते थे, इसी से निपटने के लिए इस बाँध को बनाया गया है.
इसके अलावा ज्ञात हो मिर्ज़ापुर एक पहाड़ी इलाका है और ऐसे में गर्मी के मौसम में वहां पानी की काफी कमी हो जाती है जिस वजह से वहां के लोगों के लिए पीने लायक पानी की भी मुसीबत खड़ी हो जाती है.
फिलहाल, एक बार फिर पीएम मोदी ने इलेक्शन के पहले जनता को अपनी ओर खींच लिया है, देखना यह है कि जनता इस “विकास” को कैसे समझती है.