Eco Friendly Marriage : भारत को स्वच्छ बनाने के लिए केरल में शुरू हुई इको फ्रेंडली शादियां

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फोटो साभार- द हिंदू

Eco Friendly Marriage : एक कदम स्वच्छता की ओर

Eco Friendly Marriage : प्रधानमंत्री मोदी ने जब से स्वच्छ भारत का नारा दिया है तबसे देश के लोग इसे लेकर और जागरुक हुए हैं.

देश में जगह – जगह भारत को स्वच्छ रखने की मुहीम चलाई जा रही है.
ऐसी ही एक अनूठी पहल दक्षिण भारत के केरल राज्य में की गई है.
केरल में होने वाली शादी बारातों में मेहमानों को प्लास्टिक या डिस्पोजल प्लेट में खाना परोसने से रोकने के लिए सरकार की तरफ से  ग्रीन प्नोटोकॉल लागू किया गया है.
आमतौर पर हम सभी जानते हैं कि हमारे देश में शादी को सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है.
और इसे यादगार बनाने के लिए लोग कई तरह के साजो सजावट,खानपान पर जमकर खर्चा करते हैं. जिससे कहीं ना कहीं प्रदुषण भी फैलता है.
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केरल सरकार का नया प्रोटोकॉल
केरल में शादियां के दौरान होने वाले प्रदुषण को रोकने के लिए वहां की सरकार ने इस ग्रीन प्रोटोकॉल को लागू किया है.
इस नियम के लागू होने के बाद लोग शादी समारोहों में प्लास्टिक के ग्लास, प्लेट्स, थर्मोकोल्स के सजावटी सामान आदि का प्रयोग नहीं कर पाएंगे .
बल्कि इसके एवज में सरकार लोगों को ग्लास और इको फ्रेंडली मेटल से बने कलश, प्लेट, बर्तन और अन्य सामान इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित और जागरूक करेगी.
आदेश के उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्यवाही
गौरतलब है कि सरकार के इस प्रोटोकॉल को तोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.
इसके लिए राज्य के स्पेशल स्कवॉड और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारी मैरिज हॉल्स, कन्वेंशन सेंटर, होटल और अन्य शादी स्थलों का औचक निरीक्षण करेंगे.
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ये लोग वीडियो और फोटो को देखकर भी पता लगाएंगे कि शादी में ग्रीन प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं.
वहीं प्रोटोकॉल का पालन करने वालों को जिला प्रशासन की ओर से ग्रीन मैरिज का सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा.
सरकार की तरफ से इस पहल को पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुन्नुर, एर्नाकुलम, कोल्लम और अलाप्पुझा जिलों में शुरू किया जा चुका है.
जिसकी सफलता के बाद सरकार की जल्द से जल्द इसे राज्य के सभी जिलों में लागू करने की योजना है.
कुन्नुर की पंचायत की पहल
आपको बता दें कि सबसे पहले इस बिना प्लास्टिक के सामानों के इस्तेमाल वाली शादियों का फैसला कोलायड पंचायत ने सुनाया था.
अपनी ग्रीन मैरिज से पहचान बना चुके पंचायत ने शुरूआत में इसे सिर्फ शादियों पर लागू किया था. मगर बाद में इसे हर उन आयोजनों में भी लागू किया जाने लगा, जिसमें 100 से अधिक लोग शामिल होते हैं.
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वहीं ऐसा ना करने वाले लोगों पर पंचायत की तरफ से 10000 का जुर्माना भी लगाया जाता है.
इसके अलावा पंचायत की तरफ से स्वच्छता को लेकर उनके द्वारा तय किए गए नियमों का पूरी तरह से पालन करने वाली शादियों को पंचायत की ओर से प्रशस्ति पत्र और प्रशस्ति चिन्ह भी दिया जाता है.
पंचायत की पहल इस मामले में भी बेहद खूबसूरत है कि उसने गांव में लगने वाले प्लास्टिक के फ्लैक्स बोर्ड और बैनरों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.
वहीं एक कदम और आगे बढ़ते हुए ये गांव अब स्कूली बच्चों के प्लास्टिक पेन और प्लास्टिक से बनी पानी की बोतलों को भी हटाने की कोशिश कर रहा है.

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