मोदी सरकार का निजता पर वार ! 10 जांच एजेंसियों को मिले किसी के भी कंप्यूटर निगरानी के अधिकार

Government Computer Monitoring Order

Government Computer Monitoring Order : 10 जांच एजेंसियो को किसी भी नागरिक के कंप्यूटर की निगरानी का अधिकार मिला

Government Computer Monitoring Order : केंद्र में लगभग साढ़े 4 साल से सत्ता में काबिज मोदी सरकार के विकास कार्य भले ही किसी को ना समझ आए हों लेकिन उनके अनोखे फैसले पूरे देशवासियों की नींद जरूर उड़ा देते हैं.

आज फिर एक बार केंद्र की भाजपा सरकार ने ऐसी घोषणा करी है जो सीधे तौर पर आपकी निजता पर आघात करती है.
दरअसल केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए देश की 10 जांच एजेंसियो को किसी भी नागरिक के कंप्यूटर की निगरानी का अधिकार दे दिया है.
यानी की अब देश के अंदर ये 10 एजेंसियां बिना कोई रोकटेक सुरक्षा के नाम पर किसी के भी कंप्यूटर एक्सेस को ट्रेस कर सकती है और उसके  सभी डाटा हासिल कर सकती हैं. जिसे छोटे वाक्य में कंप्यूटर की जासूसी करना कहेंगे.
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यहां आपके लिए जानना जरूरी है कि देश के इतिहास में ये पहली बार है जब किन्ही एजेंसियों को इस तरह का अधिकार दिया गया है.
किस धारा के तहत दिए गए अधिकार
गौरतलब है कि बीते दिन 20 दिसंबर 2018 को केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने इस बारे में आदेश जारी किया.
जिसमें गृह मंत्रालय के साइबर सुरक्षा एवं सूचना विभाग ने इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी ऐक्ट के सेक्शन 69 (1) के तहत एजेंसियों को यह अधिकार दिए जाने का जिक्र था.
यही नहीं इस आदेश के साथ उन 10 एजेसियों की सूचि भी गृहमंत्रालय की तरफ से जारी की गई है.
कौन कौन सी एजेंसियों को मिला अधिकार
1.इंटेलिजेंस ब्यूरो
2. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
3. प्रवर्तन निदेशालय
4. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज
5. डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस
6. सीबीआई
7. एनआईए
8. कैबिनेट सचिवालय (रॉ)
9. डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस
10. दिल्ली पुलिस कमिश्नर
विपक्ष हुआ हमलावर
ये तो जगजाहिर था कि केंद्र के इस फैसले के खिलाफ निंदा करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं होगी.
विपक्ष ने तो इसे सीधे पर सरकार द्वारा लोगों निजता पर एक बड़ा प्रहार माना है.
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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करके कटाक्ष किया की अब समझ में आया कि घर-घर मोदी का मतलब लोगों के कंप्यूटर में झांकना है.
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा कि ‘इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की अनुमति देने का सरकार का आदेश नागरिक स्वतंत्रता एवं लोगों की निजी स्वतंत्रता पर सीधा हमला है.
एजेंसियों को फोन कॉल एवं कंप्यूटरों की बिना किसी जांच के जासूसी करने का एकमुश्त ताकत देना बहुत ही चिंताजनक है और इसके दुरुपयोग होने की भी आशंका है.
दूसरी तरफ कांग्रेस के ही प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बीजेपी के ही नारे के प्रयोग करते हुए कहा कि अबकी बार, निजता पर वार