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पहले नोटबंदी फिर जीएसटी और अब सीलिंग, दिल्ली के दुकानदारों का यूं ठप्प होता बाजार

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Sealing In Delhi
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Sealing In Delhi : दिल्ली में हो रही सीलिंग से व्यापारियों के अंदर सता रहा बेरोजगारी का डर

Sealing In Delhi : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से दिल्ली में शुरू हुई सीलिंग को लेकर वहां व्यापारियों का हंगामा रुकने का नाम नहीं ले रहा है.

दिल्ली के दुकानदारों के अंदर सीलिंग को लेकर रोष इस कदर बढ़ा हुआ है कि वो भूख हड़ताल से लेकर 48 घंटे का बंद तक बुला चुके हैं. यही नहीं एक बार फिर वो वो इसके खिलाफ 2 और 3 फरवरी को दिल्ली बंद का ऐलान कर दिया है.
इसके बारे में व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अध्यक्ष ने शनिवार को घोषणा की है
बता दें कि दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के आदेश पर की जा रही है.
गौरतलब है कि पिछले दिनों ही कोर्ट के द्वारा बनाई गई कमेटी ने यह साफ कर दिया है कि दुकानदारों को अब कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा बल्कि अब सीधे इनकी दुकानों की सीलिंग की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मॉनिटरिंग कमेटी दिल्ली के तीनों नगर निगमों के आयुक्त, डीडीए और अन्य एजेंसियों के साथ बैठक कर पूरी स्थिति पर पहले ही जानकारी इकट्ठा कर चुकी है.
वहीं दिल्ली के पॉश इलाकों से शुरू हुई सीलिंग की यह कार्रवाई अब दिल्ली के दूसरे इलाकों में भी शुरू कर दी गई है.
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दिल्ली के व्यापारियों की परेशानियां
सीलिंग को लेकर कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बिना किसी तरह का नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए तथा बिना कोई कारण बताए इस तरह का एक्शन देश की राजधानी के व्यापारियों के लिए अमानवीय है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम कानून 1957 की मूल प्रावधानों को ताक पर रखा जा रहा है. ऐसे में दिल्ली के कई छोटे व्यापारिय जिनका घर उनकी छोटी सी दुकान से चलता है उनके लिए अब जीवनयापन करना मुश्किल हो रहा है.
खंडेलवाल ने कहा कि इसके लिए हम बंद, मार्च और धरना-प्रदर्शन का आयोजन करेंगे क्योंकि सभी व्यापारियों का सरकार पर आरोप है कि वो उनके बारे में सोच ही नहीं रही है.
पहले नोटबंदी के कारण उन्हें परेशानियां उठानी पड़ी थी. इसके बाद जीएसटी के कारण भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. और अब सीलिंग से तो उनका पूरा व्यापार ही ठप्प हो जाऐगा, ऐसे में लाखों व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे.
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क्या है ये सीलिंग और कितनी है जरूरी
दिल्ली में दुकानों में निर्माण के लिए एमसीडी की परमिशन की जरूरत होती है मगर शुरूआत में किसी ने भी इसकी जरूरत ना समझी और बेतहाशा अवैध निर्माण करने लगे.
दुर्भाग्य की बात यह है कि दिल्ली में निर्मित करीब 44 लाख आवासीय व व्यवसायिक इकाईयों में से केवल 2 लाख के ही नक्शे पारित (स्वीकृत) हैं.
इतने बड़े पैमाने पर हुए इन निर्माण को लेकर साल 2006 में दिल्ली सरकार के आदेश के बाद कार्यवाही करते हुए सीलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई थी. हालांकि इसके कुछ ही दिनों के बाद इस कार्यवाही पर स्टे लग गया और फिर ये प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई.
लेकिन एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए दोबारा से सीलिंग करने का आदेश दिया है.
बताते चलें कि सरकारी की पुरानी समय में ढिलाई बरतने के कारण दिल्ली के मुख्य बाजारों में सडकों व फुटपाथ पर आज कब्जे इस तरह बढ़ गए हैं कि वहां आमजन का चलना फिरना भी दूभर हो गया है.

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