जानें नए सरोगेसी बिल से जुड़े हर सवाल का जवाब

Know About Surrogacy Bill
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Know About Surrogacy Bill : लोकसभा में मोदी सरकार सरोगेसी विधेयक  को मंजूरी दिलाने में कामयाब हो गई .

Know About Surrogacy Bill : पिछले हफ्ते बुधवार यानि की 19 दिसंबर को लोकसभा में मोदी सरकार सरोगेसी विधेयक  को मंजूरी दिलाने में कामयाब हो गई .

बताया जा रहा है कि इस विधेयक के आने के बाद देश में चल रही कमर्शियल सरोगेसी और इसका दुरुपयोग रोके जाने जैसी घटनाओं पर लगाम कसेगी.
इस विधेयक में सबसे ख़ास बात ये रही कि इसमें सरोगेसी के संदर्भ में ‘मां’ को परिभाषित किया गया है और यह भी तय किया गया है कि कौन लोग सरोगेसी की सेवा ले सकते हैं.
ऐसे में ऐसा माना जा रहा है कि ये विधेयक हर मायने में महिलाओं पर सरोगेसी के नाम पर किये जा रहे शोषण को रोकने में कारगर साबित होगा.
अब कौन नहीं ले पायेगा सरोगेसी का सहारा?
सरोगेसी के सन्दर्भ में जारी किये गए इस विधेयक के मुताबिक समलैंगिक, सिंगल पैरेंट और लिव-इन पार्टनर्स किराए की कोख यानि कि सरोगेसी का सहारा नहीं ले पाएंगे.
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हालांकि इसके लिए कुछ महिला सांसदों ने मांग की है कि सिंगल पैरेंट सरोगेसी के जरिए माता या पिता बन सकें इसके लिए बिल में प्रावधान होने चाहिए.
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क्यों लिया जा रहा है ये फैसला ?
अब सवाल ये भी उठता है कि अगर सरोगेसी से कोई कभी माँ ना बन पाने वाली औरत माँ बनने का सुख पा सकती है तो भला इसके खिलाफ इस तरह के सख्त नियम-कानून क्यों बनाये जा रहे हैं?
तो इसका जवाब यह है कि पिछले कुछ सालों से भारत को ‘सरोगेसी हब’ कहा जाने लगा था, क्योंकि यहां कम खर्च में किराए की कोख आसानी से मिल जाती थी.
इसी के चलते कई मामलों में तो यहाँ तक देखा गया है कि ग्रामीण और ट्राइबल महिलाओं का खास तौर पर शोषण होना शुरू हो गया था.
एक-एक महिला परिवार पैसों की लालच में डिलवरी के तुरंत बाद ही दूसरा गर्भ धारण कर ले रही थी जिसका सीधा असर उनके स्वास्थय पर पड़ रहा था. 
आमतौर पर देखने में आया है कि सरोगेसी से ज्यादातर अमीर लोग ही संतान सुख हासिल कर रहे हैं.
इस चलन में वो महिलाएं भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं जो अपना फिगर ख़राब किये बगैर माँ बनने का सुख पाना चाहती हैं.
आपको जानकर हैरानी होगी कि एक रिपोर्ट के अनुसार अमीर लोग आईवीएफ सेंटरों को सरोगेसी के लिए 20 से 50 लाख रुपए तक की मोटी रकम तक देते हैं.
लेकिन वहीं  किराए पर कोख देने वाली महिलाओं को इसका एक छोटा हिस्सा यानि कि केवल 40 से 50 हजार रुपए ही मिलते हैं.
ऐसा माना जाने लगा है कि इसी के चलते भारत में सरोगेसी सबसे सस्ती पड़ती है.
एक अनुमान की बात की जाये तो भारत में करीब 2 हजार सरोगेसी क्लिनिक चल रहे हैं. यूएस, ब्रिटेन, नेपाल, थाईलैंड जैसे कई देश सरोगेसी को गैरकानूनी करार दे चुके हैं.
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कौन अभी भी उठा सकेगा सरोगेसी का फायदा?
1) अब सिर्फ वो ही कपल्स सरोगेसी करा पाएंगे जो किन्हीं कारणों से माता-पिता नहीं बन सकते.
2) ऐसे कपल्स जिन्हें शादी के पांच साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ हो.
3) सरोगेट मदर का करीबी रिश्तेदार होना जरूरी है. वह एक ही बार सरोगेट मदर बन सकती है.
4) सरोगेट मदर और उससे संतान चाह रहे कपल को सक्षम अधिकारी से एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट लेना होगा.
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क्या होती है सरोगेसी?
इस तकनीक द्वारा आईवीएफ टेक्नोलॉजी के जरिए पति के स्पर्म और पत्नी के एग्स से बना एंब्रियो तीसरी महिला की कोख में इंजेक्ट किया जाता है. 
जैसा की हम सब जानते हैं कि कई बार कुछ कपल्स जब किन्हीं कारणों से माता-पिता नहीं बन सकते तो वो अपनी ज़िन्दगी में इस खोयी ख़ुशी को पाने के लिए इसका सहारा लेते हैं.