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Ayurvedic Drug For Vitiligo : ल्यूकोडर्मा का उपचार हुआ आसान, विश्व भर में प्रसिद्ध हो रही हैं आयुर्वेदिक दवाएं

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Ayurvedic Drug For Vitiligo
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Ayurvedic Drug For Vitiligo : डीआरडीओ निर्मित है ये दवा

Ayurvedic Drug For Vitiligo : विश्व भर के दवा खरीददारों में ल्यूकोडर्मा (विटिलिगो,शरीर पर पड़ने वाले सफेद दाग) के लिए डीआरडीओ(रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन)  के शोधकर्ताओं द्वारा बनाई गई आयुर्वेदिक दवा के प्रति रुझान देखने को मिल रहा है.

आयूष मंत्रालय द्वारा हाल ही में दिल्ली में इंटरनेश्नल आरोग्य महोत्सव 2017 का आयोजन किया गया.
इस महोत्सव में दुनिया भर की तमाम फार्मास्युटिकल कंपनियां त्वचा रोग ल्यूकोडरमा (सफेद दाग) के लिए इजात की गई आयुर्वेदिक दवाओं को लेकर काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं.
गौरतलब है कि दुनिया भर में ल्यूकोडर्मा को बहुत ही गंभीर रोग माना जाता रहा है, इसे छुआ छूत से होने वाली बीमारी कहे जाने के साथ लाइलाज भी माना जाता है.
आपको बता दें कि डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में लाइलाज कही जाने वाली इस बिमारी के लिए आयुर्वेदिक दवा ल्यूकोस्किन को बनाया है.
दरअसल विश्वभर में ल्यूकोडर्मा से जुड़े कई भ्रम हैं और इसके उपचार के प्रति लोगों में जागरुकता की कमी ने इस बीमारी को और भी जटिल बना दिया है, जिसका गहरा प्रभाव रोगग्रसित मरीजों पर पड़ता है.
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डीआरडीओ के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक, हेमंत पांडे ने बताया कि एलोपैथिक दवाओं ने इस बीमारी को हउआ बना दिया हैं, इन दवाओं को लेने वाले मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया है, जबकि ऐसा नहीं होता है.
उन्होंने बताया कि मरीज एलोपैथिक दवा का सेवन करना एक बार बंद कर देता है तो ये रोग फिर से उसके शरीर में उभर जाता है.
लेकिन ऐसा हर्बल आधारित दवाओं के साथ नहीं है, यह दवाएं रोग को जड़ से खत्म कर देती हैं. यही कारण है कि हर्बल दवाओं को स्थानीय मांग से प्रोत्साहन मिल रहा है.
क्या है ल्यूकोडर्मा (सफेद दाग)
त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि त्वचा रोग ल्यूकोडरमा एक ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) शरीर को ही नुकसान पहुंचाने लगती है.
इसमें स्किन का रंग बनाने वाले सेल्स मेलानोसाइट (Melanocyte) खत्म होने लगते हैं या काम करना बंद कर देते हैं, जिससे शरीर पर जगह-जगह सफेद-से धब्बे बन जाते हैं.
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क्यों होता है सफेद दाग
त्वचा पर सफेद दाग या सफेद चक्कतों के पीछे तीन कारण हो सकते हैं- पोषक तत्वों की कमी, फंगल संक्रमण या फिर ल्यूकोडरमा (विटिलिगो) नामक चर्म रोग. आमतौर पर इनमें से ही किसी एक समस्या की वजह से त्वचा पर ये सफेद दाग की बीमारी होती है.
क्या रहे हैं रोग के आंकड़े
देखा जाता है कि दुनिया भर में विटिलिगो की घटनाएं 1 से 2 प्रतिशत तक होती हैं, जबकि भारत में यह लगभग 4 से 5 प्रतिशत है.
वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार इसका सबसे ज्यादा प्रभाव राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में हैं जहां यह 5 से 8 प्रतिशत के बराबर हैं.
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