Home हेल्थ रिपोर्ट सावधान ! अगर आपको डायबिटीज है तो अपनी आंखों की रोशनी बचाने...

सावधान ! अगर आपको डायबिटीज है तो अपनी आंखों की रोशनी बचाने के लिए पढ़ें ये खबर

SHARE
Diabetic Retinopathy
demo pic

Diabetic Retinopathy : डायबिटिक मरीज के अंदर इस बिमारी के होने का बना रहता है खतरा 

Diabetic Retinopathy : भारत में डायबिटीज(मधुमेह) की समस्या हर उम्र के लोगों के लिए आम बात हो गई है.
वैसे तो डायबिटीज के बारे में हम सब जानते हैं लेकिन इसके कारण से शरीर के दूसरे अन्य हिस्सों पर भी प्रभाव पड़ता है इसे शायद ही कुछ लोग जानते हैं.
हैरान करने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि डायबिटीज से सबसे ज्यादा प्रभाव मुख्य तौर पर आंखों पर पड़ता है.
यह भी पढ़ें – दोपहर की धूप कहीं आपके लिए न बन जाए खतरनाक, जानें क्या कहती है रिपोर्ट
क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी 
दरअसल डायबिटीज के कारण आंखों के रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली महीन नलिकाएं डेमैज हो जाती हैं जिसकी वजह से या तो धुंधलापन आंखों पर छा जाता है या फिर कुछ दिखाई ही नहीं देता.
मेडिकल साइंस ने इस समस्या को डायबिटिक रेटिनोपैथी का नाम दिया है. अगर इस समस्या का सही समय से इलाज नहीं किया जाए तो मरीज अंधा भी हौ जाता है.
अगर उम्र की बात करें तो सबसे ज्यादा यह बीमारी 20 से 70 वर्ष की उम्र के लोगों को होती है यानि की यह समस्या युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में देखने को मिल सकती है.
आपको बता दें कि अपने शुरुआती दौर में इस बिमारी का पहचानना काफी मुश्किल रहता है और जब 40 प्रतिशत आंखें को संक्रमण लग जाता है तब इसका प्रभाव देखने को मिलता है.
वहीं इस बीमारी में एक और डरा देने वाली बात होती है कि जब तक डायबिटीज बनी रहती है, आंखों में डायबीटिक रेटिनोपैथी की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है.
हालांकि खुशी की बात है कि मेडिकल साइंस में इसका इलाजा मुमकिन है और लेजर तकनीक से इस बीमारी को 60 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.
क्या है आंखों पर असर पड़ने का कारण
दरअसल डायबिटीज (मधुमेह) के कारण शरीर के इंसुलिन लेवल पर असर पड़ता है. इंसुलिन ग्लूकोज को शरीर में पहुंचाता है और जब इंसुलिन नहीं बन पाता या कम बनने लगता है तो इसके कारण ग्लूकोज कोशिकाओं में सही तरह से नहीं जा पाता और खून में घुलने लगता है.
यही कारण है कि खून में शुगर का लेवल बढ़ने लगता है और वो खून शरीर के सभी हिस्सों में पहुंचता है तो इससे रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और आंखों पर असर डालने लगती हैं.
यह भी पढ़ें फिल्म अभिनेता इरफान खान को हुआ न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर, जानें क्या है ये बीमारी
डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण
अगर आपके चश्मे का नंबर बार-बार बढ़ जाता है या आंखों में किसी तरह का संक्रमण होने लगता है तो इस बीमारी को पहचान पाना आसान है.
इसके साथ अगर सुबह उठने के बाद कम या हल्का दिखाई दे, सफेद या काला मोतियाबिंद हो जाए, आंखों में खून की शिराएं या खून के थक्के नजर आने लगे या रेटिना से खून आने लगे तो ये लक्षण भी डायबिटिक रेटिनोपैथी के ही हैं.
साथ ही सिर में दर्द, अचानक आंखों की रोशनी कम होना भी इस बीमारी के लक्षणों में शामिल हैं.
कैसे करें बचाव 
अगर आपको डायबिटीज है तो अपना ब्लड शुगर और कलेस्ट्रॉल की मात्रा को कंट्रोल में रखें. समय-समय पर आंखों की जांच करवाते रहें. यदि आपको यह बीमारी 8-10 सालों से है तो हर 3 महीने पर आंखों की जांच अवश्य करवाएं.
साथ ही आँखों में दर्द, आँखों में अंधेरा छाने जैसे लक्षण को पहचानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आँखों की रोशनी खोने से खुद को बचाएं.
आजकल कुछ दवाओं का आंख में इंजेक्शंस भी लगाया जाता है, जो डाइबिटिक रेटिनोपैथी में होने वाले परिवर्तनों को रोकने में सहायक होती है.