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Global Hunger Index 2017: कुपोषण के मामले में 119 देशों की सूची में भारत का 100 वां स्थान

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global hunger index 2017

Global Hunger Index 2017: नेपाल और पाकिस्तान भी हमसे ऊपर

Global Hunger Index 2017: अंतरराष्ट्रीय फूड पॉलिसी रिसर्च संस्थान की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कुपोषण के मामले में भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स की 119 देशों की सूची में 100 वें नंबर पर है. जबकि पिछले साल भारत का स्थान 97 वें नंबर पर था.

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में भूख से मरने वालों की संख्या घटने की बजाए और तेजी से बढ़ रही है.
भारत को संस्थान द्वारा बनाई गई रिपोर्ट में 100 में से 31.4 अंक मिले हैं और वह इस लिस्ट में अपना स्थान तीन अन्य देश श्रीलंका,दीजीबुती और साउथ सुदान के साथ शेयर कर रहा है.
काम नहीं कर रहे सरकारी प्रोग्राम !
Global Hunger Index 2017: अंतरराष्ट्रीय फूड पॉलिसी रिसर्च इंसिट्यूट दुनिया भर में भूखे लोगों की संख्या पर ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी करता है.
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 25 सालों में भारत के खाना बर्बादी करने के आकड़ों में तो कोई फर्क नहीं पड़ा है. लेकिन कुपोषण की वजह से होने वाले बच्चों की मौत के आकड़ों में मामूली सुधार जरूर देखने को मिला है.
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जीएचआई रिपोर्ट के मुताबिक भारत का क्षेत्रफल दक्षिण एशिया का तीन चौथाई हिस्सा है ऐसे में वहां के हालात दक्षिण एशिया के बाकि देशों पर भी बहुत प्रभाव डालते हैं.
हालांकि भारत ने स्थिति संभालने के लिए इंटीग्रेटेड चाइल्ड डवलेपमेंट सर्विस और नेशनल हेल्थ मिशन जैसे प्रोग्राम चला रखे हैं मगर इनसे देश में कुपोषण को कम करने में कोई फर्क नहीं पड़ा है, क्योंकि यह उचित लोगों तक पहुंचने में नाकाम रहे हैं.
भारत में कुपोषण के तीन कारण
Global Hunger Index 2017: जीएचआई की यह रिपोर्ट 2015-16 में किए गए नेशनल हेल्थ सर्वे के आधार पर बनाई गई है जिसमें इसके तीन कारण बताए गए हैं.
पहला भारत में खाघ चीजों और महिलाओं के द्वारा स्तनपान कराने वाले दूध में आने वाली कमी को बताया गया है. जो पहले 52.7 प्रतिशत था वो अब घटकर 42.7 प्रतिशत हो गया है..
दूसरा कारण देश में 6 महीने से लेकर 23 महीने तक के बच्चों में सिर्फ 9.6 प्रतिशत ही पर्याप्त डाइट पाई गई है, जिसकी वजह से 5 साल के उम्र से कम 35.7 बच्चों का वजन तय से कम पाया गया है.
तीसरा कारण देश में शौचालयों की समस्या को बताया गया है. भारत में 48.4 प्रतिशत ऐसे घर हैं जहां साफ और ढंग के शौचालयों की कमी है.
गौरतलब है कि भारत का जीएचआई स्कोर 1992 में 46.2 था वो 2017 में घटकर 31.4 हो गया है.
नेपाल, पाकिस्तान के अलावा भारत इस मामले में सभी ब्रिक्स देशों में सबसे नीचे स्थान पर है.
यह आंकड़े चिंताजनक है और जरूरी है कि भारत की सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.

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