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हेल्थकेयर में भारत पड़ोसी देशों से भी पीछे, 195 देशों की सूची में मिला 145वां स्थान

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Health Care Report 2018 : असम और उत्तर प्रदेश को सबसे कम अंक मिले

Health Care Report 2018 : भारत एक बढ़ती आबादी वाला देश है जहां स्वस्थ्य रहना हर एक का प्राथमिक निजी अधिकार है.

आजादी के बाद से देश में स्वास्थ्य सेवा में सुधार के अनेकों कदम उठाए गए, लेकिन हाल ही में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और उनकी गुणवत्ता के मामलों पर किए गए एक अध्ययन के आंकड़े भारत की कुछ और ही तस्वीर बयान कर रहे हैं.
बता दें कि द लैंसेट द्वारा किए गए इस अध्ययन में 195 देशों को शामिल किया गया है, जिसमें भारत 145वें स्थान पर है.
यही नहीं इस अध्ययन के अनुसार सभी देशों की स्वास्थ्य सेवा और गुणवत्ता की सूची में भारत की स्थिति चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान से भी पीछे है.
हालांकि ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज के अध्ययन में 1990 के बाद से भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और गुणवत्ता मामलों की स्थिति में काफी सुधार देखा गया  है.
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आपको बता दें कि साल 2016 में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और गुणवत्ता के मामले में भारत को 41.2 अंक मिले हैं जबकि साल 1990 में यह अंकों का आंकड़ा 24.7 था.
यह अध्ययन बताता है कि साल 2016 में गोवा और केरल को सबसे अधिक अंक मिले. वहीं प्रत्येक को 60 से अधिक अंक मिले, जबकि असम और उत्तर प्रदेश को सबसे कम अंक मिले,यानि दोनों के अंक 40 से कम रहे.
भारत सूची में चीन (48), श्रीलंका (71), बांग्लादेश (133) और भूटान (134) से भी नीचे है, जबकि स्वास्थ्य सूची (हेल्थ इंडेक्स) में भारत का स्थान नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से बेहतर है.
इस अध्ययन की रिपोर्ट में साल 2016 में एचएक्यू के मामले में जिन पांच देशों का प्रदर्शन सबसे उम्दा रहा वे आइसलैंड, नॉर्वे, नीदरलैंड, लक्ज़मबर्ग और फिनलैंड व ऑस्ट्रेलिया हैं.
वहीं सबसे बुरा प्रदर्शन करने वाले देशों में केंद्रीय अफ्रीकन गणराज्य, सोमालिया, गिनी-बिसाउ, चाड और अफ़ग़ानिस्तान रहे.
अध्ययन के अनुसार, तपेदिक (टीबी), दिल की बीमारी, पक्षाघात , टेस्टिक्युलर कैंसर, कोलोन कैंसर और किडनी की बीमारी से निपटने के मामलों में भारत का बेहद खराब प्रदर्शन है.
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बता दें कि इस अध्ययन में गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवा की पहुंच को मापने के लिए एक सूचकांक का इस्तेमाल किया, जो मृत्यु के 32 कारणों पर आधारित है.
यह पहली बार है कि अध्ययन में भी स्वास्थ्य सेवा का उपयोग और साथ ही क्षेत्रों में भी गुणवत्ता का विश्लेषण किया गया है.