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India Healthcare Expenditure : भारत ने 2016-17 में स्वास्थ्य पर खर्च किया कुल जीडीपी का 1.5 फीसदी

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India Healthcare Expenditure : अमेरिका,जापान हमसे कई गुना आगे

India Healthcare Expenditure : संसद के शीतकालीन सत्र में आज केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्य सेवा में सरकार द्वारा खर्च की गई राशि के आकड़े पेश किए.

लोकसभा में कांग्रेस सांसद राजू शेट्टी,हरिओम राठौड़ तथा अन्य सदस्यों ने एक लिखित प्रश्न में देश के अंदर पिछले तीन सालों के दौरान सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च किए राशि की जानकारी मांगी थी.
जिसके जवाब में स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने आज सदन को बताया कि पिछले 3 वर्षों के दौरान भारत सरकार ने देश की स्वास्थ्य सेवा पर कुल जीडीपी की 1.2 से लेकर 1.5 फीसदी तक की राशि खर्च की है.
मंत्री महोदया ने सदन के समक्ष आकड़ें पेश करते हुए बताया कि वर्ष 2016-17 में कुल जीडीपी का 1.5 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च हुआ है जबकि वर्ष 2015-16 में 1.4 फीसदी और वर्ष 2014-15 में यह 1.2 फीसदी रहा.
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अमेरिका,जापान हमसे कई गुना आगे
मंत्री अनुप्रिया ने सदन में उदाहरण के तौर पर दुनिया के कुछ अन्य प्रमुख देशों के स्वास्थ्य पर किए गए खर्च संबंधित आकड़े भी रखे.
उन्होंने आकड़ों के माध्यम से देश को अवगत कराया कि वर्ष 2015-16 में अमेरिका ने अपनी जीडीपी का 17.43 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च किया है. वहीं जापान ने 10.90, फ्रांस ने 11.67 और चीन ने 5.88 फीसदी अपने देश की जीडीपी के बराबार राशि खर्च की.

कैंसर जांच करने वाली मशीनों की कमी

गौरतलब है कि देश में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडियोथेरेपी मशीनों की संख्या केवल 600 हैं. जबकि इनकी संख्या कम से कम 1200 होनी चाहिए थी.
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार सरकार की कोशिश है कि 2018 के अंत तक कम से कम 200 नई मशीनों को खरीद लिया जाए.
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देश में 100 दवाओं में 10 दवा नकली
आपको जानकर यह हैरानी होगी कि भारत में 10 दवा में हर 1 दवा नकली निकलती है, या यूं कहें कि हमारे यहां 10 फीसद दवा बाजार में नकली बिक रही है.
यह आंकड़े किसी छोटी मोटी एजेंसी के नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़ी संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जारी किए हैं.
23 नवंबर को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यूएचओ ने अपने सर्वे में कुल 48,218 दवा के सैंपलों पर 100 तरीके से अध्ययन किया था.
जिसके बाद यह पाया गया है कि कम और मध्ययम आय वाले देशों में करीब 10.5 फीसद दवाएं नकली व घटिया क्वालिटी की बिक रही हैं जिनमें हमारे भारत का नाम भी है.

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