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शरीर पर इन 8 लक्षणों को ना करें अनदेखा, जानें किस बीमारी की तरफ है ये इशारा…

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Lung Cancer Causes
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Lung Cancer Causes : ब्रिटेन में फेफड़ों का कैंसर होना दूसरी सामान्य बीमारी है…

Lung Cancer Causes :  ब्रिटेन में हर साल 43,500 लोगों में फैफड़ों के कैंसर के लक्षण पहचाने जाते हैं, कहा जाए तो फेफड़ों का कैंसर यहां के लिए दूसरी सामान्य बीमारी है.

सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं बल्कि दुनिया के हर देश में लोगों के अंदर फेफड़ों के कैंसर वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है जिसमें हमारा भारत भी शामिल है.
इस बिमारी के प्रमुख लक्षण खांसी, शरीर का थका हुआ महसूस होना और भूख का मर जाना माना जाता है.
क्या है फेंफड़ों का कैंसर
प्राथमिक तौर पर यह कैंसर शरीर के फेफड़ों में पनपता है. इस तरह का कैंसर ब्रिटेन के लोगों में पाए जाने वाले कैंसर का दूसरा सबसे आम प्रकार माना जाता है.
कैंसर का यह प्रकार 80 प्रतिशत से अधिक मामलों में सबसे आम होता है, ये स्क्वैमस सेल, कार्सिनोमा, एडेनोकार्किनोमा या बड़े सेल कार्सिनोमा में हो सकता है.
इस प्रकार में गैर छोटे-छोटे कोशिकाएं होती हैं. जबकि छोटी सेल वाले फेफड़ों का कैंसर अपने आप में दुर्लभ प्रकार का होता है जो अधिक तेज़ी से फैलता है.
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कौन होता है प्रभावित
फेंफड़ों का कैंसर मुख्यत: उम्रदराज लोगों को प्रभावित करता है. यह महिलाओं और पुरुषों में लगभग समान रूप से देखने को मिलता है, हालांकि यह 40 वर्ष से छोटे आयु वाले लोगों में कम पाया जाता है.
एनएचएस के अनुसार व्यक्ति की उम्र के साथ फेफड़ों के कैंसर होने की आशंका तेजी से बढ़ जाती है जिसमें देखा जाए तो 70-74 साल के लोगों में यह सबसे आम है.
जानें क्या हैं 8 लक्षण
आमतौर पर शुरुआत की स्टेज में फेंफड़ों के कैंसर के लक्षणों के कोई संकेत नहीं मिल पाते हैं लेकिन बीमारी होने की स्थिति में लक्षण विकसित होने लगते हैं, जिनमें शीर्ष लक्षण हैं…
1. अधिक समय से खांसी का होना
2. लंबे समय तक हो रही खांसी में बदलाव आना
3. सांस का कम हो जाना
4. खांसी करते हुए कफ या थूक में खून का निकलना
5. छाती या कंधे में दर्द का होना
6. भूख में कमी आ जाना
7. शरीर में थकान महसूस होना
8. वजन का घट जाना
साथ ही फेफड़े के कैंसर में खांसी होते हुए आवाज का बदल जाना, छाती और कंधे में एक कर्कश आवाज निकलना और निगलने में कठिनाई और पसलियों के नीचे दर्द और असुविधा होना भी शामिल है. यही नहीं उंगलियों और नाखूनों के आकार में बदलाव आना, चेहरे और गर्दन में सूजन भी इस बीमारी के संकेत हैं.
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फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण
फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण अधिक मात्रा में धूम्रपान करना माना गया है और ऐसा करने वालों के अंदर इस समस्या की संभावना आम लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक होती है.
सिगरेट में मौजूद जीव-विष रूपी पदार्थ हमारे फेफड़ों तक ऑक्सीजन को जाने से रोकते हैं जिसके कारण हमें कफ और खांसी के साथ-साथ कई तरह की श्वास संबंधी बीमारियां होती हैं. जो बाद में फेफड़ों के कैंसर या अन्य रोगों के रूप में सामने आती हैं.
इलाज
बीमारी का इलाज उसके प्रकार और रोगी में बीमारी की स्टेज पर निर्भर करता है. गैर छोटे-सेल वाले फेफड़ों के कैंसर में इलाज कुछ मामलों में सर्जरी से किया जा सकता है, जबकि अन्य प्रकार के कैंसर में कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की आवश्यकता हो सकती है.
खासकर अगर बीमारी शरीर में फैल गई हो या मरीज को अन्य कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो इस दौरान सर्जरी से ही इलाज किया जाता है.
वहीं छोटे-छोटे फेफड़ों के कैंसर का आमतौर पर कीमोथेरेपी के साथ इलाज किया जाता है और कभी-कभी रेडियोथेरेपी के साथ संयोजन में भी इससे मरीज के उपचार में मदद मिलती है.

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