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सावधान! अगर चलते हुए पैरों में होती है तकलीफ तो आपको इस बिमारी का है खतरा

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Peripheral Artery Disease
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Peripheral Artery Disease  : पेरीफेरल आर्टरी डिजीज (पीएडी) पैरों और हाथों में होने वाली बीमारी है, जानें कारण और उपाय

Peripheral Artery Disease  : व्यस्तता और खान पान की लापरवाही ने आज बुजुर्ग और जवान में कोई अंतर नहीं छोड़ा है.

आमतौर पर बुजुर्गों में हाथ-पैरों में दर्द की समस्या देखी जाती थी, लेकिन अब हर उम्र के व्यक्ति को चलते समय पैरों में तकलीफ की शिकायत है.
चलने फिरने में पैरों और हाथों में तकलीफ होना ये कोई आम बात नहीं है, मेडिकल साइंस की भाषा में इस समस्या को परिधीय धमनी रोग (पेरीफेरल आर्टरी डिजीज या पीएडी) कहा जाता है.
बता दें कि इस बीमारी में पैरों और हाथों में रक्त संचार में बाधा पहुंचती है, जिसके कारण कई तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं.
 क्या है पीए़डी
पैरों में रक्त प्रवाह जब सुचारु रुप से काम नहीं करता तो रक्त संचार में कमी आ जाती है. हालांकि इसके सुचारु रुप से न चलने के कारण धमनियों में होने वाले रोगों के विकास का खतरा कम हो सकता हो जाता है.
बता दें कि पेरीफरल आर्टरी डिसीस (पीएडी) पैरों की धमनियों को संकुचित करती है, मांसपेशियों में रक्त प्रवाह को सीमित कर देती है और इससे चलने या खड़े रहने के दौरान तेज दर्द का सामना करना पड़ता है.
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 क्या है खतरा
समय रहते अगर इस बीमारी का इलाज शुरू नहीं किया गया तो इसमें मरीज के प्रभावित अंग को काटने की नौबत भी आ सकती है और गंभीर स्थिति में उसकी मौत भी संभव है.
शरीर के निचले अंगों की धमनियों में संकरापन या अवरोध होने की स्थिति में पेरिफेरल धमनी रोग उत्पन्न होते हैं.
एथेरोस्क्लीरोसिस नामक रोग होना इसका सबसे सामान्य कारण है, जो किशोरावस्था से ही पनपने लगता है. इसके कुछ समय बाद यह दशकों-तक बढ़ता रहता है और इसी कारण रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा हो जाती है.
अगर समय से इस रोग का उपचार नहीं किया जाए, तो यह पैरों में दिक्कत पैदा करता है और चलने-फिरने की क्षमता में कमी आती है.
 क्या हैं लक्षण
इस बीमारी में सीने में दर्द होता है, जिसे एंजाइना कहा जाता है और वहीं अगर मस्तिष्क में ऐसा होता है, तो उसे स्ट्रोक कहते हैं.
इस बीमारी के लक्षण नसों में ऐंठन आना, चलते समय दर्द होना और धमनियों में रक्त प्रवाह में रुकावट होना आदि समस्याएं हैं.
 क्या है कारण
इसके कारण की बात करें तो उम्र का बढऩा, धूम्रपान, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हाइपरकोलेस्टेरोलेमिया (रक्त में कोलेस्टेरॉल की अनियंत्रित मौजूदगी) जैसे कारक शामिल हैं.
यही नहीं यदि मरीज के  परिवार के सदस्यों को पैरों की धमनियों में रुकावट की समस्या है, तो पीएडी होने का खतरा अधिक होता है.
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 डायग्नोसिस
पीएडी का पता लगाने के लिए कई परीक्षण किये जा सकते हैं. एंकल ब्रैकियल इंडेक्स (एबीआई), अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे अन्य परीक्षण भी किए जाते हैं.
 रोकथाम
धूम्रपान करना, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हाई कोलेस्टेरॉल आदि समस्याओं से ग्रस्त होना पीएडी के जोखिम को बढ़ा देता है इसलिए याद रहें, अप कोलेस्टेरॉल को नियंत्रित करने से पीएडी की बिगड़ती स्थिति को रोका जा सकता है.
धूम्रपान छोडऩे और मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने पर क्लाडीकेशन के लक्षणों (जैसे दर्द) में सुधार हो सकता है.
वहीं क्लाडीकेशन के लक्षणों में सुधार करने के लिए कई दवाएं दी जाती हैं, लेकिन व्यायाम क्लाडीकेशन के लक्षणों को कम कर सकता है.