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Rubber Bullet : भीड़ पर पुलिस से रबड़ की गोलियां ना चलाने की अपील, जानिए क्या है वजह

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Rubber Bullet : अध्ययन में यह बातें आई सामने

Rubber Bullet : अक्सर आप देखते होंगे कि भीड़ द्वारा किसी तरह की हिंसा किए जाने पर पुलिस उन्हें नियंत्रित करने के लिए रबड़ की गोलिंया फायर करती है.

ये रबड़ की गोलियां बड़ी ही तेजी से जाकर भीड़ में मौजूद लोगों को लगती हैं और वो घायल हो जाते हैं.
पुलिस प्रशासन का ऐसा मानना है कि इन गोलियों के लगने के डर से लोग इधर इधर भागने लगते हैं और स्थिति काबू में हो जाती है.
लेकिन हाल में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली रबड़ की गोलियां लोगों के लिए बेहद हानिकारक है.
शोधकर्ताओं ने अपने किए गए अध्ययन में यह दावा किया है कि भीड़ में रबड़ की गोलियों से घायल होने वाले हर 100 व्यक्ति में से 3 की मौत हो जाती है.
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अध्ययन में यह बातें आई सामने
भारत समेत दुनिया के 9 देशों से जुटाए गए आकड़ों पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में पुलिस प्रशासन से यह अपील की गई है कि वो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किसी और विकल्प का इस्तेमाल करें.
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले की रोहिणी हार समेत अनुसंधानकर्ताओं के एक दल ने वर्ष 1990 से वर्ष 2017 के बीच भारत, इस्राइल , फलस्तीन के क्षेत्रों, अमेरिका, उत्तरी आयरलैंड, स्विट्जरलैंड और नेपाल में रबड़ की गोलियों के कारण घायल और मारे गए लोगों की संख्या के बारे में प्रकाशित 26 वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई रिपोर्टों की समीक्षा करी है.
जिसके बाद अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि इन 27 वर्षों में कुल 1984 लोग रबड़ की गोलियों से घायल हुए थे जिनमें से 53 यानि की 3 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है.
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गोलियों से कई हमेशा के लिए हुए अपंग
अनुसंधानकर्ताओं द्वारा बीएमजे ओपन नाम की अंग्रेजी पत्रिका में लिखे गए लेख में कहा गया है कि बेशक गोलियों का इस्तेमाल लोगों को जान से मारने के लिए नहीं, बल्कि दंगे या भीड़ को नियंत्रित करने के मकसद से किया जाता है मगर यह भी सच है कि इससे कई लोग मारे गए हैं या बुरी तरह घायल हुए हैं.
लेख में दी गई जानकारी के अनुसार करीब 300 (15.5 फीसदी) रबड़ बुलेट से घायल लोग हमेशा के लिए शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं.
गौरतलब है कि इस अध्ययन का मकसद पुलिस द्वारा चलाई जाने वाली रबड़ की गोलियों से पीड़ित लोगों की संख्या का पता करना है.

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