Home हेल्थ रिपोर्ट दिल के मरीजों के लिए अच्छी खबर, दवा वाले स्टेंट के दाम...

दिल के मरीजों के लिए अच्छी खबर, दवा वाले स्टेंट के दाम हुए 8 प्रतिशत कम

SHARE
Stents Price Revised
demo pic

Stents Price Revised : पिछले साल भी सरकार ने घटाए थे दाम

Stents Price Revised : दिल के मरीजों के इलाज में लगने वाले खर्च को सरकार ने थोड़ा और कम करने का ऐलान किया है

दरअसल देश में दवाओं की कीमतों की देखरेख करने वाली नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ( NPPA ) ने दवा लगे हुए स्टेंट(DES) के दामों में 8 फीसदी की कटौती करने का फैसला किया है.
इस कम हुई कीमतों का लाभ आज यानि की मंगलवार से प्रभावी रूप से पूरे देश में लागू कर दिए गए हैं जिसमें 31 मार्च 2019 तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
NPPA ने अपनी घोषणा में बताया कि उसने ड्रग इलूटिंग, बायोरिजॉर्बेबल और बायोडिग्रेडेबल कोरोनरी के दवा लगे हुए स्टेंट की अधिकतम कीमत को 27890 रुपए कर दिया है जो पहले 30180 रुपए थी, हालांकि इस कम हुई कीमतों में जीएसटी शामिल नहीं है.
यह भी पढ़ें हिमाचल के एक डॉक्टर ने खोज निकाला रेबीज का सबसे सस्ता इलाज, WHO ने भी किया प्रमाणित
बता दें कि पिछले साल 14 फरवरी को ही एनपीपीए ने बिना दवा लगे हुए स्टेंट की कीमतों को 85 प्रतिशत तक घटा कर 7400 रुपए कर दिया था जो पहले 2 लाख तक की कीमत में मिलता था.
वहीं इस बार स्टेंट की कीमतों को दोबारा से रिवाइस करते हुए अथार्टी ने बिना दवा लगे मेटल कोरोनरी स्टेंट के दाम बढ़ाकर 7660 रुपए कर दिया है.
क्या होता है कोरोनरी स्टेंट
कोरोनरी स्टेंट एक कृत्रिम उपकरण की तरह होता है जो दिल के दौरे की बीमारी के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है.
यह पतला तार सरीखा ट्यूब होता है, जिन्हें ब्लॉकेज हटाने के लिए दिल की धमनियों में पहुंचाया जाता है ताकि दिल के दौरे का खतरा कम किया जा सके .
यह भी पढ़ें एरोबिक व्यायाम करने से दिमाग की बिमारी से ग्रसित रोगियों को मिलता है लाभ – अध्ययन
अन्य दवाओं के दामों पर भी  विचार
अन्य नोटिफिकेशन में एनपीपीए ने एंजियोप्लास्टी में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरणों से संबंधित आकड़े जारी किए हैं जिसमें यह सामने आया है कि इनकी एमआरपी उनके इंपोर्ट प्राइस से औसतन 170-405 पर्सेंट और डिस्ट्रीब्यूटर प्राइस से 60-240 पर्सेंट ज्यादा पर सेल की जाती है.
उदाहरण के तौर पर कार्डियक बैलून कैथेटर के एमआरपी इसके इंपोर्ट प्राइस से औसतन 405 पर्सेंट और डिस्ट्रीब्यूटर प्राइस से 234 पर्सेंट ज्यादा हैं.
हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि सरकार इन प्रॉडक्ट्स के दाम की सीमा तय करना चाहती है या नहीं.