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दोपहर की धूप कहीं आपके लिए न बन जाए खतरनाक, जानें क्या कहती है रिपोर्ट

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Heat Stroke Precautions
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UV Rays Harmful Effect :  दोपहर के 12 बजे से लेकर 2 बजे तक घर से निकलना आपकी हेल्थ को कर सकता है खराब

UV Rays Harmful Effect : एम्स की स्टडी के अनुसार गर्मियों में दोपहर के 12 बजे से लेकर 2 बजे तक घर से निकलना आपकी हेल्थ को कर सकता है खराब.
सुहानी सर्दियों के जाते ही हर तरफ गर्मियों से बचने की तैयारियां शुरू हो गई हैं. जाहिर है अप्रैल आते आते सूरज का पारा बढ़ता ही चला जाएगा.
ऐसे में बढ़ती गर्मियों में दोपहर की तेज तिलमिलाती धूप आपको घर में कैद होने पर मजबूर करने लगेगी और आप बेसब्री से शाम ढ़लने का इंतजार करने लगेंगे.
गौरतलब है कि भीषण गर्मियों में दोपहर के समय धूप का रूप सबसे खतरनाक होता है. ऐसा इसलिए क्यों कि 12 से 2 बजे तक सूरज की रोशनी में अल्ट्रावॉयलेट किरणों का प्रभाव काफी ज्यादा होता है.
हाल ही में एम्स ने भी इस बात की पुष्टि की है कि इन दो घंटों में UV किरणों का प्रभाव सबसे खतरनाक होता है. जो मनुष्य के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है.
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पांच साल के अध्ययन में हुआ खुलासा
इस अध्ययन पर बात करते हुए एम्स के आरपी सेंटर की डॉ राधिका टंडन कहती हैं कि यह समय सूरज की UV किरणों यानि अल्ट्रावायलट रेंज के एक्टिव रहने का समय होता है और इसी समय किरणें सबसे ज्यादा एक्सपोजर के साथ धरती पर पड़ती हैं. जिसके कारण आंखों में ड्राईनेस और एलर्जी होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.
हालांकि यह बात सच है कि सूरज की रोशनी शरीर में विटामिन डी की पूर्ति करती है लेकिन इन दो घंटों के दौरान ये रोशनी मानव के लिए बेहद हानिकारक बन जाती है.
डॉ राधिका ने यह भी बताया कि आंखों में एलर्जी और ड्राइनेस का दूसरा कारण प्रदूषण भी हो सकता है लेकिन एम्स द्वारा की गई इस स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार एलर्जी का मुख्य कारण UV किरणें ही हैं.
आपको बता दें कि ICMR के फंड से साल 2010 से लेकर 2015 के बीच में यूवी किरणों की इस स्टडी को 11 हजार मरीजों पर किया गया है. जिसमें राजधानी दिल्ली और NCR क्षेत्र के मरीज शामिल हैं.
इस स्टडी में एक नॉर्थ ईस्ट का पहाड़ी क्षेत्र और आंध्र प्रदेश का कोस्टल एरिया भी शामिल किया गया है. बताते चलें कि कोस्टल एरिया में अधिकतम मात्रा में यूवी किरणों का प्रभाव होता है. लेकिन इस अध्ययन में दिल्ली में सबसे ज्यादा ये प्रदूषित यूवी किरणें पायी गईं हैं.
UV किरणों को लेकर की गई इस तुलनात्मक स्टडी में दिल्ली में रहने वाले लोगों की आंखों में ड्राइनेस का आंकडॉ 22.7 फीसद रहा और वहीं ऐलर्जी की तुलनात्मक रिपोर्ट में दोनों क्षेत्रों में ही प्रभाव ज्यादा देखा गया.