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भोपाल-झुग्गियों में शिक्षा स्तर सुधारने के लिए 11 वर्षीय बच्ची चला रही मुफ्त लाइब्रेरी

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किसी ने सच ही कहा है कि बच्चों को कभी कम नहीं आंकना चाहिए. कभी कभी वो कुछ ऐसा काम कर जाते हैं जो हम सबके लिए एक मिसाल बन जाती है.
मध्यप्रदेश के भोपाल में झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली एक बच्ची ने शिक्षा के महत्व को प्रोत्साहित करने के लिए लाइब्रेरी की शुरूआत की है. इसमें गौर करने वाली यह बात है कि इस बच्ची की उम्र अभी महज 11 साल है जिसका नाम मुस्कान अहिरवार है. मुस्कान ने इस लाइब्रेरी का निर्माण अपनी बस्ती में शिक्षा व्यवस्था के स्तर को बढ़ाने के लिए किया है.
शुरूआत में मुस्कान ने केवल 25 किताबों के साथ ‘बाल पुस्तकालय‘ नाम से इस लाइब्रेरी की शुरूआत की थी. जिसमें किताबों की संख्या अब बढ़कर 1000 हो चुकी हैं. यह लाइब्रेरी राजधानी भोपाल के राज्य सचिवालय से करीब 1 किलोमीटर दूर झोपड़ी में बनी है.
11 वर्षीय लड़की के इस प्रयास को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रशंसा की है. उन्होंने उचित पुस्तकालय स्थापित करने के लिए मुस्कान को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान भी की.
उन्होंने अपने आवास पर मुस्कान से मुलाकत करते हुए उसे 2 लाख रुपये का चेक सौंप दिया. इसके अलावा उन्होंने मुस्कान से अपने लिए भी एक कमरे की लाइब्रेरी बनाने का आग्रह किया.
उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि मुस्कान जैसी लड़कियों को पूरे समाज द्वारा समर्थन प्रदान करने पर स्थिति जल्द ही बदल जाएगी.
11 वर्षीय मुस्कान के पिता की मृत्यु इसी साल 7 जुलाई को हो चुकि है. अपने पापा को याद करते हुए मुस्कान कहती हैं कि मेरे पापा हमेशा बड़ा काम करने के लिए कहते थे.
वो कहती हैं कि मैंने अपने पिता मनोहर अहिरवार की मृत्यु के बाद पुस्तकालय को जारी रखने की आशा खो दी थी. मगर मुख्यमंत्री के द्वारा वित्तीय सहायता मिलने के बाद उन्होंने बताया कि अब उन्हें और अन्य झुग्गी के बच्चों को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता.
मुस्कान की लाइब्रेरी प्रति दिन 5 बजे और 7 बजे के बीच खुलती है. उनकी लाइब्रेरी में लगभग 20 से 25 बच्चे रोज किताब पढ़ने आते हैं. वो कहती हैं कि हम उन्हें पढ़ने के लिए एक चटाई पर बिठाते हैं .
उन्होंने बताया कि कुछ बच्चे पढ़ने के लिए किताबों को घर पर भी ले जाते हैं जिसके लिए हमने एक रजिस्टर बना रखा है. उन्होंने कहा कि यह जानने के लिए क्या वे किताबें सच में पढ़ते हैं, मैं कभी-कभी उनसे सवाल भी पूछा करती हूं.