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Army Organ Donation : सलाम ! भारतीय सेना की एक पूरी बटालियन ने मरने के बाद किया अंगदान का फैसला

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Army Organ Donation
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Army Organ Donation : टेरिटोरियल आर्मी की 125 इंफेट्री के हैं जवान

Army Organ Donation : अपनी अंतिम सांस तक देश को दुश्मनों से बचाने वाले वीर सैनिक अब मरने के बाद भी खुद को दूसरे के काम लाना चाहते हैं.

दरअसल भारतीय टेरिटोरियल आर्मी की 123 इंफेंट्री की पूरी बटालिन ने अंगदान को बढ़ावा देने के लिए मरने के बाद खुद के शरीर को दान करने का फैसला किया है.
इसके लिए यूनिट की तरफ से अपने अंगदान संबंधित आवेदन पत्र सशस्त्र सेना के नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल के अंग, पुनर्प्राप्ति और प्रत्यारोपण प्राधिकरण (एओआरटीए) में जमा करा दिए गए हैं.
बता दें कि इस यूनिट की सर्वप्रथम स्थापना लेफ्टिनेंट कर्नल जोरावर सिंह ने 1 नवंबर 1956 में की थी. जो अब भारतीय टेरिटोरियल आर्मी की स्वैच्छिक इकाई है और फिलहाल में इसका भारतीय सेना के ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट से संबद्ध है.
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यूनिट के मौजूदा कमांडिंग ऑफिसर कर्नल जीएस चुंडवत ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि यह काम यूनिट के सभी सिपाहियों के समर्थन से किया जा रहा है और इस बारे में उन्होंने लिखित में अपने मरने के बाद अंगदाव करने का वचन भी दिया है.
उन्होंने बताया कि इसके अलावा इस नेक काम में सशस्त्र बलों के अनुसंधान और रेफरल (आर एंड आर) अस्पताल की तरफ से भी उचित सहयोग मिल रहा है.
गौरतलब है कि हमारे देश में आज भी शरीर के अंगों की मांग के तुलना में अंगदान करने वालों की संख्या काफी कम है. हालांकि सरकार अंग दान के विषय में लोगों तक जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा रही है मगर वो अपर्याप्त साबित हो रही हैं.
अंगदान एक ऐसी क्रिया है जिससे ना केवल हम किसी दूसरे असहाय व्यक्ति को नई जिंदगी देते हैं बल्कि इससे मेडिकल साइंस के क्षेत्र में मानव शरीर पर की जाने वाली नई रिसर्च का भी पता चलता है.
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क्या होती है टेरिटोरियल आर्मी

टेरिटोरियल या प्रादेशिक आर्मी भारतीय सेना की एक ईकाई है. इस आर्मी के जवानों को प्रतिवर्ष कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर वो देश की रक्षा के लिये काम आ सकें.

टेरिटोरियल आर्मी (टीए) की स्थापना 9 अक्टूबर 1949 को भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने की थी.
इसकी मुख्य भूमिका सेना को स्थिर कार्यों से राहत देना, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और जहां जीवन प्रभावित हो रहा है वहां जाकर आवश्यक सेवाओं की रखरखाव में नागरिक अधिकारियों की सहायता करना रहता है.

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