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देहरादून-कबाड़ बीनने वाले बच्चों को मुफ्त ट्यूशन दे रहे बैंक के गार्ड अकंल

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फोटो साभार-गूगल
फोटो साभार-गूगल
अपने गुजारे के लिए तो दो वक्त की रोटी भी काफी है, लेकिन अगर हम अपने जीवन में दूसरों की मदद न कर पाएं तो उस जिंदगी को जीना ही व्यर्थ है. कुछ ऐसी ही सोच रखते हैं बच्चों के प्यारे गार्ड अंकल.
देहरादून में आईएसबीटी के समीप इलाहाबाद बैंक शाखा में गार्ड के रूप में तैनात विजेंद्र सिंह ने गरीब बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा संभाला हुआ है. वह बैंक में ड्यूटी के दौरान शाम को नियमित रूप से बैंक परिसर में गरीब बच्चों को 2 घंटे का निशुल्क ट्यूशन देते हैं. कक्षा में बच्चों को सभी विषय पढ़ाए जाते हैं. साथ ही बच्चों की भीतरी प्रतिभा को बाहर निकालने के लिए समय-समय पर खेल, डांस, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन भी कराते हैं.
विजेंद्र सिंह अपनी कक्षा के बच्चों को अपने बच्चों की तरह प्यार करते हैं और उनकी हर जरूरत को भी पूरा करते हैं.
पूरा वेतन बच्चों पर करते हैं खर्च
जिस भी बच्चे को कॉपी-पेंसिल की जरूरत होती है, वह निसंकोच गार्ड अंकल से हक से कहता है और फिर गार्ड अंकल कुछ मिनटों के अंदर ही उनकी मंगाई हुई चीज को उनके हाथों में रख देते हैं.
विजेंद्र सिंह को बैंक से 6000 रूपये मिलते हैं, वह सब पैसे बच्चों की सेवा में लगा देते हैं. विजेंद्र कहते हैं कि उनके परिवार का गुजारा करने के लिए सेना की पेंशन पर्याप्त है.
सेना से रिटायर्ड हैं विजेंद्र
विजेंद्र सिंह गढ़वाल राइफल से 10 साल पहले रिटायर्ड हो चुके हैं. इसके बाद उन्होंने खाली बैठने से अच्छा बैंक में गार्ड की नौकरी करने की सोची. तीन वर्ष पूर्व जब उन्होंने देहरादून की सड़कों पर कबाड़ बीनते बच्चों को देखा तो उन्हें बड़ा दुख हुआ.
उन्होंने जब उऩ बच्चों से पूछा कि तुम स्कूल क्यों नहीं जाते हो, क्या तुम्हें मालूम नहीं कि कबाड़ बीनकर भविष्य नहीं बनता. इसके बाद जो बच्चों ने जवाब दिया वह विजेंद्र सिंह के दिल में घर गया. उन बच्चों का जवाब था कि कूड़ा नहीं बीनेंगे तो घर का खर्चा आप चलाओगे क्या. वैसे भी मां-बाप के पास पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है.
इस वाक्ये के बाद उन्हें गरीब बच्चों को पढ़ाने की प्रेरणा मिली जो आर्थिक तंगी के कारण स्कूल नहीं जा पाते हैं.
इसके बाद से विजेंद्र ने 15 बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया.