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Beti Zindabad Bakery : छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी की शिकार लड़कियां अपने स्वावलंबन के लिए चला रहीं बेकरी

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Beti Zindabad Bakery : तस्करी के दंश को भुलाने में सार्थक पहल

Beti Zindabad Bakery : छत्तीसगढ़ सरकार ने मानव तस्करी के चुंगल से छुड़ायी गयी लड़कियों के लिए जशपुर जिले में एक खास तरह की बेकरी चैन स्थापित की है.

यह चेन सरकार की ‘बेटी जिंदाबाद‘ अभियान के तहत की गई पहल है जो जीवन स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित किया जा रहा है.
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इन आदिवासी लड़कियों को बेकरी चैन की इस नई व्यवस्था के साथ अपनी जिंदगी को एक बार फिर से संवारने का मौका दिया गया है.
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तस्करी के दंश को भुलाने में सार्थक
इन आदिवासी लड़कियों ने गुलामी, वैश्यावृत्ति, बंधुआ मजदूरी करते हुए अपने जीवन का सबसे बुरा दौर बिताया है. वह सभी फिर से इस दलदल में ना फंसे इसके लिए बेकरी का यह अनूठा विचार सरकार द्वारा पेश किया गया है.
15 से 21 वर्ष की उम्र के बीच की इन लड़कियों को इस क्रिसमस पर लगभग 100 केक बनाने का ऑर्डर भी मिला था जो शुरुआत में उनके लिए बहुत अच्छा रहा था.
इसके साथ ही उन्होंने ऑर्डर से मिलने वाले पैसों से अपनी बेकरी की यूनिट स्थापित करने के लिए मिले कर्ज का भी भुगतान शुरू कर दिया है.
साथ ही वह अपने जैसी उन लड़कियों को बचाने में भी योगदान कर रही जिन्हें नौकरी का लालच देकर गंदे कामों के दलदल में फंसा दिया जाता है.
फिलहाल जिले के  पाथलगांव क्षेत्र में प्रसिद्ध हो चुकी ‘बेटी जिंदाबाद’ बेकरी में वर्तमान में 10 लड़कियां कार्यरत हैं.
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चाइल्ड हेल्पलाइन से मिली मदद
टीओआई से बातचीत में समूह की लड़कियों में से एक ने कहा कि उसे कुछ साल पहले हैदराबाद में अवैध व्यापार करके एक घर में काम करने के लिए बेच दिया गया था.
लड़की ने अपने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उसके मालिक शहर से बाहर जाते तो एक मोबाइल फोन और खाने के लिए थोड़ा बहुत सामान छोड़कर उसे कमरे में अकेले बंद करके चले जाते थे.
उसने बताया कि वो पूरी तरह से थक गई थी और घर लौटना चाहती थी. फिर एक दिन मुझे टीवी पर एक अपराध शो के माध्यम से बच्चों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर के बारे में पता चला. उसके बाद मैंनें तुरंत ही अपने बचाव के लिए उसे बुलाया और तस्करों को भी गिरफ्तार कराया.
लड़की ने बताया कि उसके 9 साल के काम के लिए किसी से कोई मेहताना नहीं मिला. उसने बताया कि उसे उस घर में हर तरह से प्रताड़िया किया जाता था मगर अब वो बेकरी में काम करके बहुत खुश है.
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रोजगार के अभाव में बार-बार होती हैं तस्करी का शिकार
जशपुर कि डीएम प्रियंका शुक्ला ने बताया कि अक्सर यह देखने को मिलता है कि तस्करी में बचाई गई लड़कियां वापस नौकरी की तलाश में लौट जाती हैं क्योंकि हम उन्हें रोजगार नहीं मुहैया करा पाते.
जिस वजह से इस बार उन्होंने तमाम सामान्य मशीनों के साथ इस बेकरी को स्थापित किया है ताकि लड़कियों को यहीं रोजगार मिले और फिर से उन्हें उस दलदल में ना फंसाया जा सके.
आज उनकी बेटी जिंदाबाद बेकरी अपने केक और कुकीज़ की स्वाद से जिले में एक नई पहचान बना ली है.
गौरतलब है कि इस बेकरी का उद्घाटन 15 अगस्त 2017 को जशपुर एसपी प्रतिशांत ठाकुर और जिला न्यायाधीश रजनीश श्रीवास्तव के हाथों किया गया था.
मानव तस्करी की शिकार इन लड़कियों के लिए छत्तीसगढ़ प्रशासन की यह सोच सराहनीय है.
इससे देश के हर राज्य को सीख लेनी चाहिए और उन्हें भी इस तरह के बच्चों के लिए रोजगार के साधन मुहैया कराने चाहिए जो अपनी जिंदगी के सुनहरे दिनों में ही नरक जैसे हालातों में जीने को मजबूर हो जाते हैं.

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