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Bharatavani : इस पोर्टल से सीख सकेंगे भारत में बोली जाने वाली कोई भी भाषा

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Bharatavani : एक दूसरे को समझने में होगी आसानी

Bharatavani : हमारा देश अपनी संस्कृति के लिए दुनिया भर में मशहूर है. ऐसा कहा जाता है कि हमारे देश में हर 100 किलोमीटर के बाद लोगों कि वेश भूषा , खानपान , रीति रिवाज, संस्कृति और बोली जाने वाली भाषा बदल जाती है.

एक अनुमान के मुताबिक भारत में 1500 से भी ज्यादा भाषाएं देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों द्वारा बोली जाती है. लेकिन हम में से ना जाने कितने लोग अपनी मातृभाषा को छोड़कर बाकि भाषाएं को जानते तक नहीं.
आज शहरों में हम सभी को तमाम विदेशी भाषाएं सीखाने वाले कोचिंग सेंटर मिल जाएंगे लेकिन क्या आपने कहीं स्वदेशी भाषा सिखाने वाले कोचिंग सेंटर देखे हैं. इसी सवाल का जवाब दे रहा ‘भारतवाणी’ ऑनलाइन पोर्टल.
देश में स्वदेशी भाषाओं को बढावा देने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आदेश पर सेंट्रल इंस्टियूट ऑफ इंडियन लेंगुएज, मैसुर ने डिजिटल डिक्शनरी वाला पोर्टल तैयार किया है, जिसका नाम है भारत वाणी.
इस डिजीटल डिक्शनरी में 121 भाषाओं को शामिल किया गया है, और जल्द ही इस पोर्टल पर ऑनलाइन क्लासेज भी शुरू करने की सरकार की कोशिश है.
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कई भाषाओं में तैयार की डिक्शनरी
पिछले एक साल में जबसे इस पोर्टल की शुरूआत हुई है तबसे अब तक लगभग 50 भारतीय भाषाओं में 262 मल्टिलैंग्वेज डिक्शनरी तैयार की जा चुकी है जिसे भारतवाणी के ऐप पर भी देखा जा सकता है.
इसके साथ ही साथ नई भाषाओं को जोड़ने से पहले यह भी कोशिश की जा रही है कि पुरानी डिक्शनरियों को इस डिजिटल ऐप से जोड़ा जाए.
इस संदर्भ में मालटो-इंग्लिश-हिंदी, ओड़िया-हिंदी, लेप्छा-अंग्रेजी ऐसी कुछ डिक्शनरियां हैं जिन्हें डिजिटल करने का काम तेजी से किया जा रहा है.
भारतीय संस्कृति को जानने में मिलेगी मदद
 युनिवर्सटी ऑफ हैदराबाद के डीन प्रोफेसर मोहंती का मानना है कि भारतवाणी रिसर्च करने वालों के लिए बहुत मददगार है खासकर उनके लिए जो भारत की संस्कृति को जानना चाहते हैं.
प्रोफेसर मोहंती जो पश्चिमी भारत की भाषाओं के जानकार है और भारतवाणी कमेटी के हिस्सा भी उन्होंने यह जानकारी दी कि इस डिक्शनरी में अभी तक लगभग 7 लाख भारतीय भाषाओं में बोले जाने वाले शब्दों का अर्थ है जिस वजह से इसका डाटाबेस बहुत ड्यादा स्ट्रांग हो गया है.
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एक दूसरे को समझने में होगी आसानी
जी एन डीवे जो लिंगविस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया के हेड हैं उन्होंने बताया कि इस डिक्शनरी से लोगों को एक दूसरे की भाषा समझने में आसानी होगी और साथ ही यह उन लोगों की मदद भी करेगा जो नॉन शेड्यूल भाषाओं का प्रयोग करते है.
वहीं इस डिक्शनरी से उन बच्चों को भी फायेदा पहुंचेगा जो किसी विशेष समुदाए और क्षेत्र से आते हैं और अन्य भाषा का ज्ञान ना होने की वजह से स्कूल में परेशानी का सामना करते हैं.
कई बार तो ऐसा होता है कि भाषा के अभाव में ये बच्चे अपने आप को स्कूल में स्थापित नहीं कर पाते जिस वजह से उन्हें स्कूलों से निकाल भी दिया जाता है. ऐसे बच्चो के लिए भाषाओं के स्पीकर भी है ताकि वह शब्दों कोअच्छे से समझ सकें.
आपको बता दें कि ज्यादा भाषाओं को इससे जोड़ने के लिए ऑनलाइन प्रूफ रिडिंग की भी शुरुआत की जा रही है. क्योंकि नई भाषाओं को जोड़ने क लिए एक्सपर्ट की जरूरत होती है जो हर बार आसानी से नहीं मिलते इस वजह से ऑनलाइन तरीके से ऐसे दूर दराज के लोगों को भारतवाणी से जोड़ा जा रहा है.
उम्मीद है आने वाले समय में एक ऐसा बड़ा डाटाबेस तैयार हो जाएगा जो भारतवासियों को असली भारत से मिलाएगा. इस बात का एहसास दिलाएगा कि हमारा यह देश कितनी भाषाओं का घर है.

साभार – द हिंदू