Home ह्मयूमन कनेक्शन गांव वालों के लिए अस्पताल बना इस टैक्सी ड्राइवर ने पूरा किया...

गांव वालों के लिए अस्पताल बना इस टैक्सी ड्राइवर ने पूरा किया अपना 12 साल का सपना

SHARE
Cab Driver Builds Hospital
साभार - फेसबुक

Cab Driver Builds Hospital : बहन की मौत से मिली प्रेरणा

Cab Driver Builds Hospital : नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत फिल्म “मांझी दा माउंटेन मैन” का यह डॉयलाग तो आपने सुना ही होगा – “भगवान के भरोसे मत बैठो, क्या पता भगवान तुम्हारे भरोसे बैठा हो.”

सुनने में तो ये लाइन हम सभी को काफी प्रेरणादायक और सरल सी लगती है, लेकिन बात जब इसे असल जिंदगी में अमल करने की आए तो इतना ही मुश्किल हो जाता है.
लेकिन इसी बात का जीता जागता मिसाल बन चुके हैं कोलकता से 50 किलोमीटर दूर एक छोटे से क़स्बे(पुनरी) के रहने वाले सैफुल लश्कर.
सैफुल एक साधारण सी जिंदगी जीने वाले ऐसे टैक्सी ड्राईवर हैं, जिसने अपनी जिंदगी के 12 साल उस काम में लगा दिए जो आने वाले कई सालों तक लोगों की जान बचाने के काम आता रहेगा.
यह भी पढ़ें – बच्चों को पढ़ाई के लिए समझाने का तमिलनाडु के इस टीचर ने निकाला अनोखा तरीका
कहां से हुई शुरूआत
सैफुल जिस क़स्बे में रहते हैं(पुनरी) वहां किसी भी तरह की चिकित्सकिय सुविधा नहीं थी, जिसका खामियाजा वहां हर वर्ष लोगों को जान गंवा कर उठाना पड़ता था.
सैफुल की अपनी बहन की जान भी इन्ही कमियों के कारण चली गई, और तभी से उन्होंने ठान लिया था कि वो उस गांव में एक हॉस्पिटल का निर्माण करवा के रहेंगे ताकि उनकी बहन की तरह आगे कभी किसी की जान ईलाज के अभाव में ना जाए .
सैफुल करीब 12 साल तक लोगों से इस काम के लिए दान मांगते रहे, दान में मिली रकम और अपनी पूरी कमाई के अलावा पत्नी के सारे गहनों को बेचने के बाद आज सैफुल इस नेक काम को अंजाम देने में सफल हो गए हैं.
कई लोगों की मदद से साकार हुआ सपना
सैफुल बताते हैं कि वो कई सालों तक इस सपने को पूरा करने के लिए निरंतर इसके पीछे लगे रहे और वो कहते हैं न, कि जब नेकी हो तो हर कोई हाथ बंटाता है.
ऐसे ही सैफुल के साथ भी हुआ उनके इस काम में कई लोगों ने उनकी मदद करी जिसका नतीजा आज पूरा बंगाल देख रहा है.
बता दें कि बंगाल की ही श्रृष्टि घोष जिन्होंने अपनी पूरे महीने की पगार इस नेक काम के लिए सैफुल को दे दी थी उनसे ही इस हॉस्पिटल का उद्घाटन शनिवार को कराया गया.
श्रृष्टि के बारे में सैफुल कहते हैं कि एक दिन वो मेरे टैक्सी से कहीं जा रही थी, किराया लेते समय मैंने बाकी यात्रियों की तरह श्रृष्टि से भी हॉस्पिटल बनाने के लिए दान करने को कहा.
तभी श्रृष्टि ने मुझे 100 रुपये दिए और मेरा टेलीफोन नंबर मांग कर चली गयी. पिछले साल जून में श्रृष्टि वापस मेरे पास आई और मुझे 25000 रुपये दे कर चली गई जो कि उनकी पहली तनख्वाह थी.
वहीं इस बारे में श्रृष्टि कहती हैं कि अगर कोई इतना नेक काम करता है तो हमारा कर्तव्य बनता है कि हम उनका साथ दें.
यह भी पढ़ें – Bapu Ki Kutiya : छत्तीसगढ़ सरकार की इस कुटिया में बुजुर्गों का दूर होगा अकेलापन
कई गांवों को मिलेगा लाभ
हॉस्पिटल में बीते शनिवार से इलाज शुरू हो चुका है जिसमें फिलहाल अभी 6 बेड लगाये गए हैं. सैफुल ने बताया कि अगले 6 महीनों में वो इसमें और 30 बेड लगवाने की तैयारी में हैं.
वही एक गैर सरकारी संस्था ने सैफुल के इस काम से प्रभावित होते हुए इस हॉस्पिटल को एक x-ray मशीन दान में दिया है.
एक अनुमान के मुताबिक अभी तक इस तीन मंजिला हॉस्पिटल को बनाने में सैफुल को करीब 36 लाख रूपये तक का खर्च आया है.
गौरतलब है कि यह हॉस्पिटल ना सिर्फ छोटे से क़स्बे मुनरी के लिए लाभदायक होगा, साथ ही आसपास के करीब 100 गाँवों के लिए भी वरदान साबित होगा.
सैफुल ने अपनी 17 साल की बहन को खो कर जो नेक कदम गांव के लोगों की भलाई के लिए उठाया है वो वाकई काफी साहसी है.

For More Hindi Positive News and Positive News India Follow Us On FacebookTwitter, Instagram, and Google Plus