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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए CRPF ने शुरू की ‘बाइक एंबुलेंस सेवा’

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CRPF Bike Ambulance
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CRPF Bike Ambulance : 24 घंटे मिल रही लोगों को मदद

CRPF Bike Ambulance : छत्तीसगढ़ से जुड़ी जब भी हम कोई खबर सुनते हैं तो हमारे मन में जो सबसे पहली तस्वीर चित्रित होती है वो वहां की नक्सलियों और पुलिस बल के बीच होने वाली हिंसा की रहती है.

ऐसा इसलिए क्योंकि छत्तीसगढ़ देश का वह इलाका है जो आए दिन नक्सलवाद की वजह से हमेशा मुश्किलों में रहता है.
इसी वजह से वहां विकास होना तो दूर आज तक लोगों की जिंदगी के लिए जरूरी मूल सुविधाएं भी ठीक से उपलब्ध नहीं हो सकी हैं.
हालांकि हमारे देश के सीआपीएफ जवान रह रहकर वहां का जीवन समान्य करने की कोशिश में लगे रहते है, जिसमें उन्हें कुछ हद तक कामयाबी भी मिली है.
बता दें कि नकस्लवादियों की हिंसा से पिछड़ चुके इस राज्य में सबसे ज्यादा परेशानी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर रहती है, जिसका इलाज सीआरपीएफ की 85वीं बटेलियन ने ढूंढ निकाला है.
सीआरपीएफ ने छत्तीसगढ़ में बीजापुर क्षेत्र के दूरस्थ जंगल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए एक अद्वितीय बाइक एम्बुलेंस की शुरुआत की है.
मेडिकल टीमों से लैस सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों ने बीजापुर जिले के लगभग 70 गांवों में बीमार और घायलों के लिए इस एंबुलेंस को तैयार किया है.
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कहां से आया आइडिया
दरअसल कुछ साल पहले सीआरपीएफ को नक्सल विरोधी गश्ती दल और ऑपरेशन के लिए चार पहिया वाली मोटरबाइक दी गई थी, लेकिन इन चार पहियों की वजह से जवानों को दुश्मन के वाहनों का पीछा करना मुश्किल होता था.
तब सीआरपीएफ के 85वीं बटालियन के कमांडेंट सुधीर कुमार ने सोचा कि क्यों ना हम इस वाहन का बीमार होने वाले स्थानीय लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल करें.
इस बाइक एम्बुलेंस टीम में एक डॉक्टर, एक सहायक चिकित्सक और एक सहायक फील्डसर्जिकल तैनात रहते हैं. वे गांवों में किसी व्यक्ति के बुलावे या फिर अपने गश्त में इस एंबुलेंस को साथ ले जाया करते हैं.
कमांडेंट ने बताया कि पूरे जिले के अंदरूनी इलाकों में केवल दो सरकारी स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां तक हर आदमी का पहुंच पाना काफी मुश्किल रहता है. इसलिए हर ज़रूरतमंदियों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए हमारी यह बाइक एंबुलेंस बड़ी कारगार साबित हो रही है.
इन टीमों की मदद से क्षेत्र के किसी भी दर्गम क्षेत्र में गंभीर रूप से बीमार लोग जल्द से जल्द जिला अस्पताल तक पहुंच जाते हैं.
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हर कदम पर रहता है जोखिम
सुधीर कुमार ने बताया कि इस काम को करने में जोखिम भी शामिल है क्योंकि वहां कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब सुरक्षाकर्मी स्थानीय लोगों की आपातकालीन कॉल पर जाते हैं और वहां घात लगाए नक्सलियों ने उन पर हमला कर दिया हो .
इसलिए अब हर ऐसी चिकित्सा टीम के साथ एक सशस्त्र सुरक्षा दल भी टीम के साथ भेजा जाता है ताकि दुश्मनों के किसी भी हमले से निपटा जा सके .
गौरततलब है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा शुरू की गई यह नई पहल जो पारंपरिक रूप से स्थानीय लोगों को सरकार के निधियों के उपयोग के बारे में बताएगी.
वहीं रायपुर में कमांड कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सेना ने बस्तर क्षेत्र के भी अन्य इलाकों में बीजापुर बाइक एम्बुलेंस पहल को दोहराने का फैसला किया है, ताकि वहां के नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को भी इसका लाभ मिल सके.
इसके अलावा अब सीआरपीएफ की 85 वीं बटालियन बीजापुर जिले के अंदरूनी इलाकों में रहने वाले छात्रों के बीच शिक्षा के महत्व के बारे में स्कूल सत्र आयोजित करने के लिए बाइक पर अपने अधिकारियों को भी भेज रहा है.