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कश्मीरियों के लिए ‘मददगार’ बनी सेना, हर समस्याओं का निवारण कर जीत रही दिल

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Crpf Madadgaar Helpline Initiative
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Crpf Madadgaar Helpline Initiative : हर तरह की परेशानी में कश्मीरियों को मिल रही मदद

Crpf Madadgaar Helpline Initiative : जम्मू कश्मीर में सेना की गतिविधियों पर अक्सर लोग मानवाधिकार के हनन को लेकर सवाल उठाते रहते हैं.

पाकिस्तान से लेकर भारत के भी कुछ लोग हमेशा से इस राज्य में सेना द्वारा वहां के लोगो के साथ अत्याचार और उन्हें जबरन परेशान करने की बात करते रहते हैं.
मगर इन सब के बीच हमें भारतीय सेना के उन कामों का जिक्र करना भी नहीं भूलना चाहिए जो ना जाने कितने कश्मीरियों के लिए मददगार साबित हो रही है.

जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा जिले के रहने वाले जुबेर(काल्पनिक नाम)एक दिहाड़ी मजदूर है, उनके साथ परिवार में उनकी बेगम के अलावा 5 बच्चे भी है.

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कुछ दिनों पहले जुबेर को डॉक्टरों से पता चला कि उसकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं. गरीब होने की वजह से उसके पास इसका इलाज करा पाने के लिए पैसे नहीं थे साथ ही परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी उसे औेर परेशानी करने लगी.
तभी इस बीच एक दिन जुबेर ने सीआरपीएफ की एक गाड़ी पर सेना की तरफ से चलाए जा रहे हेल्पलाइन ‘मददगार‘ का विज्ञापन देखा.,और फिर उसने उस हेल्पलाइन नंबर 14411 पर कॉल कर उनसे अपनी स्थिति बताई.
जुबेर की बाते सुनकर हंदवाड़ा की सीआरपीएफ यूनिट ने उसकी स्थिति को अपने स्तर पर सत्यापित किया जिसके बाद अब उन्हें हर महीने इलाज के लिए 10 हजार रुपये की मदद दी जा रही है.
बता दें कि जुबेर कोई पहले कश्मीरि नहीं है जिनकी मददगार हेल्पाइन के तहत मदद करी गई है. इनके अलावा हजारों कश्मीरि ऐसे हैं जो पिछले एक साल के अंदर इस मददगार योजना का लाभ उठा रहे हैं.

हर तरह की परेशानी में मिल रही मदद

सीआरपीएफ ने मददगार हेल्पलाइन की सबसे पहली शुरूआत 16 जून 2017 से करी थी.
एक साल के अंदर ही इसने कश्मीरियों का विश्वास जीत लिया और आज आलम यह है कि इसके जरिए यहां के लोगों को हर तरह की मदद मुहैया कराई जा रही है.
पानी, बिजली की समस्या से लेकर घेरेलु हिंसा, प्राकृतिक आपदा या मेडिकल संबंधी कोई दिक्कते , हर मामले में इसकी हेल्पलाइन पर लोगों की सनुवाई हो रही है और जल्द से जल्द इसका निपटारा भी .

लड़कियों के लिए वरदान

इस योजना का अगर सबसे ज्यादा फायेदा पहुंच रहा है तो वो हैं राज्य की कश्मीरि लड़कियां. हालांकि यह बात सच है कि कई बार भीड़ में शामिल होकर ये लड़कियां भी सेना या सीआरपीएफ की गाड़ियों पर पथराव करती है .
लेकिन इन घटनाओं के बीच अब तक करीब 80 हजार कश्मीरी लड़कियो ने इस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर खुद के साथ छेडखानी किए जाने पर मदद मांगती है.
बता दें कि पिछले एक साल में इन नंबर पर मदद मांगने वाले की संख्या 2,22,345 है जिसमें से 2349 मामले कानूनी कार्रवाई वाले पाए गए वहीं 2100 मामलों का संतोषजनक तरीके से निपटारा कर दिया गया. इसमें कुछ मामलों में स्थानीय पुलिस की भी मदद मांगी जाती है.
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प्रक्रिया के तहत होती है मदद

इस योजना का नेतृत्व कर रहे असिस्टेंट कमांडेंट जुनैद बताते हैं कि उनकी टीम इस नंबर पर आने वाली कॉलों की डिटेल और उनकी परेशानी को एक फार्म में भरते हैं.
जिसके बाद हम उनकी समस्या को समझने के बाद संबंधित सीआरपीएफ यूनिट को संपर्क करते हैं और उन्हें उस स्थल पर जाने के लिए आदेश दिया जाता है.
जुनैद बताते हैं कि शुरूआत में उनके पास केवल नागरिक समस्या के फोन आते थे मगर जैसे जैसे इसकी लोकप्रियता बढ़ी हमारे पास इमरजेंसी, रोजगार और करियर काउंसिलिंग के लिए भी फोन आने लगे.
यही नहीं अब तो दूर दराज के ग्रामीण नागरिक भी इस नंबर फोन कर हमसे सहायता मांग रहे हैं.
दरअसल भले ही कश्मीरियों के अंदर सेना के खिलाफ एक आक्रोष हो मगर वहां के लोग उनके द्वारा की जा रही ऐसी मददगार कोशिशों को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते.
सीआरपीएफ के एक आईजी रैंक के अधिकारी कहते हैं कि अक्सर हम लोगों पर मानवाधिकारों के उल्लंघनों का आरोप लगता रहता है, पर मुझे लगता है कि इस तरह के प्रयासों से जनता और सेना के बीच एक दोस्ताना रिश्ता कायम हो सकेगा.