Home ह्मयूमन कनेक्शन देहरादून के अभिषेक ने घर में बसाया परिंदो का संसार

देहरादून के अभिषेक ने घर में बसाया परिंदो का संसार

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देहरादून के 24 वर्षीय युवा अभिषेक उनियाल 6 वर्ष से पक्षी संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने अपने घर की दीवार और छतों पर 54 घोसलें बनाए हैं. इन घोसलों में गौरेया, बुलबुल, तोता, ब्लेक रोबिन आदि प्रजातियों के करीब 54 पक्षियों का बसेरा हैं. मगर अभिषेक गौरेया प्रजाति की चिडिय़ों के संरक्षण पर ज्यादा ध्यान देते हैं.
अभिषेक कहते हैं कि पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाने वाली गौरेया का जीवन संकट में है. उन्होंने कहा कि इनकी संख्या हर साल घट रही है. जिस वजह से मैं इन गौरेया पक्षी पर विशेष ध्यान देता हूं .
इसके अलावा अभिषेक ने अपने घर में पिटोनिया, गोदावरी, गेंदा, गुलाब, चमेली, हिबेस्कस समेत करीब 20 प्रजातियों के फूल भी लगाए हैं. उनका मानना है कि घर पर लगी फूलों की सुंदर क्यारियां पक्षियों को ज्यादा आकर्षित करती है.
ऐसे मिली प्रेरणा
अभिषेक ने बताया कि 2011 में मेरे घर के पास हाईटेंशन लाइनें लगाई जा रही थीं. वहीं दो बड़े पेड़ में गौरेया का घोसला था और उसमें अंडे भी रखे हुए थे. जब बिजली कर्मचारी द्वारा हाईटेंशन लाइन लगाने के लिए उन पेड़ों को काटा जाने लगा तो उस पर बने गौरेया के सारे अंडे जमीन पर गिर कर फूट गए. तब से ही मुझे इनके सरंक्षण का ख्याल आया.
उपयोगहीन वस्तुओं से बनाते हैं घोसले
अभिषेक के घर पर बने सभी 54 घोसलें खराब पड़ी वस्तुओं से बनाए गए हैं. इनमें फूटी हुई गुल्लक, प्लास्टिक की बड़ी बोतलें व मिट्टी का करवा आदि का ज्यादातर इस्तेमाल किया गया है. इन उपयोगहीन वस्तुओं में घास-फूस भरकर घोसलें को बनाया जाता है.

आर्मी अफसर बनना है लक्ष्य

देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित गुजराड़ा क्षेत्र में रहने वाले अभिषेक की शुरुआती पढ़ाई मार्शल स्कूल से हुई. 2014 में उन्होंने डीएवी कालेज से बीकॉम और 2016 में इकोनोमिक्स से एमए की डिग्री हासिल की. वर्तमान में अभिषेक कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) की तैयारी कर रहे हैं. अभिषेक ने बताया कि वह सेना के अनुशासन और देशभावना से इस कदर प्रभावित हैं कि वो खुद भी आर्मी में अफसर बनना चाहते हैं. अभिषेक के पिता महेश उनियाल व्यापारी हैं.जबकि मां सरिता उनियाल विकास भवन में वरिष्ठ लेखाकार हैं. उनका एक छोटा भाई भी है जो इस समय बीपीएड की पढ़ाई कर रहा है.