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वाराणसी स्टेशन के जीआरपी जवानों की अनोखी पहल, गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए प्लेटफार्म पर ही खोली पाठशाला

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Grp School For Poor Kids

Grp School For Poor Kids : रोजाना 40 छात्रों की लगती है स्कूली क्लास

Grp School For Poor Kids : अक्सर लोगों के गुस्से और नाराजगी का शिकार रहने वाली खाकी पुलिस ने मानवता की एक अलग ही मिसाल कायम की है.

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के रेलवे स्टेशन पर प्रदेश की जीआरपी पुलिस लोगों की सुरक्षा के साथ साथ शिक्षक के रोल में भी अब वहां दिखाई देने लगे हैं .
जी हां वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने एक स्कूल का संचालन शुरू किया है जिसका उद्देश्य आस पास के झुग्गी समूहों में रहने वाले उन बच्चों को शिक्षित करना जो इससे वंचित है.
बता दें कि इस स्कूल में हर रोज कम से कम 40 छात्र-छात्राएं पढ़ने आते है जिनमें छोटी-मोटी चोरी करने वाले, नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों से लेकर कूड़ा उठाने का काम करने वाले बच्चें भी शामिल रहते हैं.
जीआरपी जवानों, उप निरीक्षकों और सीओ रैंक के अधिकारियों ने इन बच्चों को पढ़ाने के लिए स्वयं सेवा से यह स्कूल शुरू किया है.
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4 पर एक खाली पड़े कमरे में 40 छात्रों के लिए कक्षाएं चलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका नाम “घूमंटू पाठशाला” (नोमैडीक कक्षा) रखा गया है.
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कैसे हुई शुरुआत
इन बच्चों के लिए स्कूल खोलने का विचार सबसे पहले जीआरपी के सीओ विमल श्रीवास्तव और एसआई विनोद कुमार को आया.
बता दें कि ये दोनों अधिकारी स्टेशन पर घूमने वाले बच्चों को पहले पकड़ते हैं और फिर उन्हें समझा बुझाकर उन्हें पढ़ाई के लिए तैयार करते हैं.
हालांकि ऐसा करने के लिए बच्चों के परिजनों को राजी करना मुश्किल जरूर होता है, लेकिन ये उन्हें मनाने में भी अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ते और अंत में उन्हें भी राजी कर लेते हैं.
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PC – NBT
बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नही छोड़ते
खास बात यह है कि जीआरपी के जवान और अधिकारी अपनी ड्यूटी करने के साथ साथ इन बच्चों को पढ़ाने के लिए अगल से समय निकालते हैं.
यही नहीं इनके लिए कॉपी-किताब, पेन-पेंसिल और बैग का इंतजाम भी ये लोग अपनी तनख्वाह से ही करते हैं. इसके अलावा पढ़ाई के दौरान इन बच्चों को दोपहर का नाश्ता भी इनके द्वारा दिया जाता है.
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पहल को एनजीओ का मिला साथ
गौरतलब है कि जीआरपी की इस अनूठी पहल को देखकर ‘साथी’ और ‘डेयर’ नाम के गैर सरकारी संगठन भी आगे आए हैं.
‘साथी’संगठन की अनिमा ने बच्चों की काउंसलिंग का काम शुरू किया है, अनिमा के मुताबिक पहले तो ये बच्चे क्लास में बैठना ही नहीं चाहते थे.
उन्होंने कहा कि इनमें से कई ऐसे बच्चे नशे के आदी बन चुके थे मगर अब काफी समझाने पर वो नशा बंद कर पढ़ाई पर ध्यान देने लगे हैं.