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हैदराबाद का जेल प्रशासन दिव्यांगो को लगा रहा निशुल्क कृत्रिम अंग

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Hyderabad Prison Artificial Limbs
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Hyderabad Prison Artificial Limbs : एनजीओ के साथ मिलकर कर रहें काम

Hyderabad Prison Artificial Limbs : शहर के भीड़ भाड वाले इलाकों में आप रोजाना कई विकलांग बेसहारा लोगों को भीख मांगते हुए देखते होगें.

इनकी स्थिति को देखकर वहां से गुजरने वाले ज्यादातर व्यक्ति उनपर तरस खाकर कुछ पैसे दे देते हैं ताकि उनका गुजारा चल सके .
हालांकि इनमें से कई ऐसे विकलांग होते हैं जिनकी मदद की जा सकती है मगर पैसों के अभाव और उचित जागरूकता की कमी के कारण वह इस तरह जीने को मजबूर रहते हैं.
लेकिन हैदराबाद की एक जेल ने दिव्यांगों को फिर से सामर्थ बनाने के लिए एक नई पहल की शुरूआत की है, जिससे भीख मांगने वाले दिव्यांगों के अंदर एक बार फिर से कुछ काम करने की इच्छा जगी है.
महाबूबनगर के मूल निवासी जी वेंकटेश इस जेल के पहले इंसान बनें जिन्हें कृत्रिम अंग लगाया गया है. बाएं पैर से जुड़े इस जयपुर ( रबर आधारित फुट) वाले कृत्रिम अंग के साथ अब वेंकटेश बिना किसी सहारे के चलने में समर्थ हो गए हैं.
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कृत्रिम अंग की मदद से वह अब चलने के अलावा दिन भर के कई काम बिना किसी परेशानी के कर लेते हैं.
बता दें कि वेंकटेश कुछ महीनों पहले दोपहिया वाहन पर सवारी करते हुए एक्सीडेंट का शिकार हो गए थे और इसकी वजह से उन्होंने घुटने के नीचे के अपने बाएं पैर के एक हिस्से को खो दिया था.
इस घटना ने उन्हें अपनी पत्नी, बच्चों और मां से दूर कर दिया था जिसके बाद वह अपनी खुद की जरूरतों को पूरा करने के लिए हैदराबाद आ गए और भीख मांगने लगे.
मगर कुछ दिन पहले राज्य सरकार के हैदराबाद शहर में भिख मांगने वालों को जेल में बंद करने के आदेश के चलते उन्हें भी जेल प्रांगण के आश्रय गृह में बंद कर दिया गया.
यहां पर जेल प्रशासन ने शहर में स्थित एक गैर सरकारी संगठन के साथ मिलकर विकलांग भिखारियों की मदद के लिए एक नई पहल की शुरूआत की .इस कार्यक्रम के तहत जेल विभाग ने अपने यहां बंद विकलांगो को एक कृत्रिम अंग मुहैया कराने की जरूरत समझी है.
गौरतलब है कि इस एनजीओ के वॉलियंटर शहर के विभिन्न हिस्सों से ऐसे लोगों के बारे में जानकारी जुटाते हैं जिन्हें उनकी जरूरत होती है. उसके बाद सर्वे कराकर ऐसे लोगों को चुना जाता है और उनके पैरों में निशुल्क कृत्रिम अंग लगा दिया जाता है.
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इस विषय में युवा सेवा के स्वयंसेविका ए प्रशांत ने कहा कि हमने जेल विभाग से संपर्क किया है ताकि जिनको जरूरत हैं उनकी मदद की जा सके.
प्रशांत कहते हैं कि हमारी संस्था भिखारियों और भगवान महावीर Viklang सहयोग समिति (बीएमवीएसएस) जैसे अन्य संगठनों के बीच एक पुल की तरह काम कर रहे हैं जो कृत्रिम अंग प्रदान करते हैं.
वहीं जेल अधिकारियों ने बताया कि इस पहल को कई बाधाओं के कारण विभाग द्वारा पूरी तरह से नहीं चलाया जा सकता है.
जेल में भिखारियों के आश्रय गृह आनंद आश्रम के प्रभारी संपत कुमार ने कहा कि हम विकलांगो का फिर से चलने फिरने बनाने हेतु सब कुछ करने के लिए तैयार हैं लेकिन हमारे सामने भी कई मुश्किलें हैं जिसके समाधान की पूरी कोशिश की जा रही है.