Home ह्मयूमन कनेक्शन ISHQ WALA LOVE: दिल की खूबसूरती पर टिकी एक खूबसुरत प्रेम कहानी

ISHQ WALA LOVE: दिल की खूबसूरती पर टिकी एक खूबसुरत प्रेम कहानी

SHARE
ishq wala love
जयप्रकाश और सुनीता अपने बच्चों के साथ

ISHQ WALA LOVE: ये कहानी है जयप्रकाश और सुनीता की

ISHQ WALA LOVE: कहते हैं सच्चा इश्क किसी चेहरे की खूबसूरती से नहीं बल्कि दो आत्माओं के मेल से होता है. जिसमें एक दूसरे के प्रति ना कोई भेदभाव रहता है और ना ही कोई मांग.

हमारी आज की ये कहानी भी एक ऐसे आशिक की है जिसके लिए प्रेम का मतलब सिर्फ चेहरे की खूबसूरती नहीं हैं. ये कहानी है बंगलोर के जयप्रकाश और उनकी पत्नी सुनीता कि.
जयप्रकाश आज अपनी जिंदगी में बेहद खुश हैं उनके पास सबकुच है, बचपन का प्यार दो प्यारे से बच्चे एक अच्छी नौकरी और बड़े-बूढ़े से भरा उनका हंसता खेलता परिवार.
मगर उनकी इस जिंदगी को इतना सफल बनाने का श्रेय जिसको जाता है वो है उनकी और उनकी पत्नी सुनीता की प्रेम कहानी.
जयप्रकाश बताते हैं कि जब वह 17 साल के थे तब उन्होंने पहली बार सुनीता को अपनी क्लास से गुजरते हुए देखा था, जिसके बाद वो बस उन्हें देखते ही रह गए.
वो बताते हैं कि उनके लिए वो पल शायद उनका पहली नजर का पहला प्यार था. और अपने इस पहले प्यार को पाने के लिए उन्होंने झट से सुनीता से दोस्ती कर ली.
मगर दोस्ती करने के बाद भी वो कभी सुनीता से अपनी दिल की बात नहीं कर पाए. उन्होंने बताया कि उस समय वो जब भी सुनिता को किसी और लड़के का साथ देखते तो उन्हें बहुत गुस्सा आता था. जिसकी वजह से उन्होंने सुनीता से बात करना भी बंद कर दिया.
इस बात से हैरान-परेशान सुनीता ने उनकी स्लैम बुक पर लिखकर उनसे कहा कि वो उनसे बात करना चाहती हैं. इसके बावजूद भी जयप्रकाश ने उनसे बात नहीं कि.
ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा फिर कुछ दिन बाद सुनीता हमेशा के लिए बंगलोर चली गई और इधर जयप्रकाश भी अपनी आगे की पढ़ाई में व्यसत हो गए. इसके बावजूद भी वो अपने दिल से सुनीता को कभी नहीं निकाल सके.
कुछ सालों बाद दोनों की मुलाकत फिर से हुई. मगर इस बार हालात कुछ और था.
जयप्रकाश ने लंबे अंतराल के बाद जब सुनीता को देखा तो उसके सिर पर एक भी बाल नहीं था, दांत और नाक सिर्फ नाम मात्र के ही दिख रहे थे, उनका चेहरा पहचानना मुश्किल हो रहा था. क्योंकि सुनीता का एक्सीडेंट हो चुका था. और इस एक्सीडेंट ने ना सिर्फ उनके चेहरे को झुलसा दिया, बल्कि उनके जिंदा रहने की वजह को भी खत्म कर दिया था.

ishq wala love

जयप्रकाश बताते हैं कि सुनीता के लिए वो ऐसे हालात थे जब लोग उसे देखकर उसका साथ छोड़ रहे थे, और जो साथ थे भी वो बस हमदर्दी के लिए थे.
उन्होंने कहा कि सुनीता के साथ लोगों द्वारा हो रहे इन व्यवहारों ने ही मुझे उनके प्रति प्यार का फिर से एहसास कराया. जिसके बाद मैंने अपना पूरा मन बना लिया कि मैं अपनी जिंदगी में सुनीता के अलावा किसी और से प्यार नहीं कर सकता.
उसके बाद इस बार उन्होंने बहुत हिम्मत करके सुनीता को प्रपोज करने के लिए मैसेज किया कि “सुनिता सिर्फ मैं ही तुम्हारा ख्याल रख सकता हूं और आगे भी रखूंगा. मै तुमसे बहुत प्यार करता हूं क्या तुम मुझसे शादी करोगी. “
सुनीता ने जैसे ही इस मैसेज को पढ़ा उन्होंने तुरंत ही जयप्रकाश को फोन किया और हंसने लगी मगर उसने ना नहीं कहा. जिसके बाद इन दोनों ने आपस में शादी करने का फैसला किया.
हालांकि शुरूआत में जयप्रकाश की मां इस रिश्ते के खिलाफ थी. लेकिन पिता के विश्वास से जयप्रकाश ने उन्हें भी मना लिया.
इस रिश्ते को लेकर जयप्रकाश का मानना है कि उनका ये फैसला उनके बड़े दिल या किसी के लिए हमदर्दी नहीं है. बल्कि वो इसे अपनी किस्मत मानते हैं जिसकी वजह से उन्हें उनका बचपन का प्यार मिल गया.
हमें ये समझना चाहिए कि प्यार चेहरे की इस बाहरी खूबसूरती से कहीं ज्यादा बढ़कर है. यह बहुत खूबसुरत एहसास है जो हर सुख दुख में साथ रहने की हिम्मत देता हैं. और शायद जयप्रकाश और सुनीता के बीच कुछ ऐसा ही था ISHQ WALA LOVE.
साभार- Being You
For More Breaking News In Hindi and Positive News India Follow Us On Facebook, Twitter, Instagram, and Google Plus