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देश में बचपन बचाने के लिए भ्रमण करेंगे कैलाश सत्यार्थी, बाल तस्करी को रोकना मुख्य मकसद

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नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी 11 सितंबर को कन्याकुमारी से बचपन बचाओ भारत यात्रा का बिगुल फुंकेंगे. कैलाश सत्यार्थी की इस बचपन बचाओ यात्रा को प्रधानमंत्री ने भी अपना समर्थन दे दिया है.
कन्याकुमारी से शुरू होने वाली बचपन बचाओ यात्रा में कैलाश सत्यार्थी देशभर में बाल अधिकारों की अलख जगाएंगे. इस यात्रा का अंतिम पड़ाव 16 अक्टूबर को दिल्ली में जाकर संपन्न होगा.
श्री सत्यार्थी अपनी इस यात्रा में छोटे बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा व बाल श्रम, यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे.
कैलाश सत्यार्थी
कैलाश सत्यार्थी पूरे देश में भ्रमण कर राज्यों में बाल अधिकारों की मौजूदा सुरक्षा की स्थिति जानेंगे. साथ ही वह प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से भी वार्ता कर बच्चों के कल्याण के लिए नया खाका तैयार करेंगे.
देश में सुरक्षित नहीं है बच्चे
2015 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार 99% बच्चों का यौन शोषण उनके पहचान वालों के द्वारा ही किया जाता है, जिससे अपराध को रोकने और पता लगाने में मुश्किल होती है.
रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 3,19,108 लड़कियां और 3,21,073 लड़कों की शादी कानूनी उम्र से पहले ही कर दी गई है. इसके अतिरिक्त, 2013-2015 के बीच लापता बच्चों की संख्या 17,560 थी.
आपको बता दे कि ये संख्या बाल तस्करी का 50 फीसद भी नहीं है. इनमें अधिकांश बच्चे बेच दिए जाते हैं. इसके बाद इन बच्चों से भीख या देह व्यापार में धकेल दिया जाता है.
जिसके बाद ये हर रोज शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीड़न का शिकार होते रहते हैं मगर इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं रहता है.
श्री सत्यार्थी ने पीड़ितों या उनके परिवारों को बोलने से रोकने के लिए समाज में मौजूद भय के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह भय अपराधियों को स्वतंत्र रूप से घूमने और अधिक घृणित अपराध करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे कई जीवन नष्ट हो जाते है.
कैलाश सत्यार्थी ने जानकारी दी कि उनकी यह यात्रा बाल-बलात्कार और बाल यौन दुर्व्यवहार के खिलाफ तीन साल की अभियान की शुरूआत है. जिसका उद्देश्य बच्चों के खिलाफ हो रहे यौन शोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मामलों की रिपोर्टिंग करना है.
इसके साथ ही साथ चिकित्सा स्वास्थ्य और क्षतिपूर्ति सहित अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया को मजबूत करना भी इस यात्रा का प्रमुख लक्ष्य रहेगा.