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केरल के स्कूलों में महिला शिक्षक को माहवारी के दौरान एक दिन का अवकाश

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केरल राज्य के सभी प्राइवेट स्कूलों ने महिलाओं के पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियों को देखते हुए एक घोषणा की है.
केरल के प्राइवेट विद्यालय संघ (AKSFSF),ने स्कूलों में पढ़ाने वाली अध्यापिकाओं को उनके पीरियड्स के दौरान छुट्टी देने का फैसला किया है.
इस छुट्टी की अवधी एक दिन रहेगी जिसका पैसा उनकी सैलरी से नहीं कटेगा.
AKSFSF के अध्यक्ष रामदास काथिरूर ने संवाददाताओं के एक सम्मेलन में कहा कि 1 अगस्त से करीब 1,200 स्कूलों में यह प्रणाली लागू कर दी गई है.
संघ के इस कदम से लगभग एक लाख महिला शिक्षकों को फायदा होगा. उन्होंने कहा कि हमारे देश में आज भी इसे एक टैबु (निषेध) माना जाता है.
उन्होंने कहा कि हमने उन्हें अवकाश देने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि प्राइवेट स्कूलों में महिला शिक्षकों की संख्या ज्यादा थी. और उन्हें काम करने के लिए यात्रा करते समय या पीरियड्स के ऐंठन वाले व्याख्यान के दौरान खड़े होने के दौरान उन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने जानकारी दी कि ये छुट्टी वो अपनी साइकिल के दौरान किसी भी दिन ले सकती हैं. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पीरिड्स के संबंध में सामाजिक निषेध धीरे-धीरे गायब हो रहा है.
इसकी छुट्टी के विचार को पहले से ज्यादा व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है. और अब हम भी इस आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं.
इसके अलावा अध्यक्ष रामदास काथिरूर ने अन्य स्कूल संगठनों से भी इस फैसले का पालन करने की उम्मीद जाताई है.
हालांकि इससे पहले  मलयालम मीडिया के समूह मातृभूमि न्यूज ने अपनी महिला कर्मचारीयों को इस तरह की छुट्टी देने की घोषणी की थी. जिसे ऐसा करने वाला राज्य का पहला संस्थान माना जाता है.
इन सब बातों के अलावा महासंघ ने यह भी जानकारी दी कि वह स्कूलों में शिक्षण के रूप में ट्रांसजेंडर समुदाय के योग्य लोगों को नियुक्त करने के लिए तैयारी कर रहें हैं.
ताकि वो भी समाज की शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र से जुड़ सके. और इस कदम से हम ट्रांसजेंडर समुदाय को भी समाज की मुख्य धारा में लाने की कोशिश कर सकें