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स्कूल के इकलौते बच्चे को पढ़ाने के लिए महाराष्ट्र का ये शिक्षक रोज करता है 50 कि.मी सफर

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Maharastra Teacher Teach Single Student
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 Maharastra Teacher Teach Single Student : हर दिन सांप और कई खतरनाक जानवरों से होता है सामना

 Maharastra Teacher Teach Single Student : आमतौर पर हमारे देश के सरकारी स्कूलों और उनके अध्यापकों के प्रति लोगों की राय बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है.

यही वजह है कि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर रहते हैं वही अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजना पसंद करते हैं.
लेकिन इन्ही सरकारी स्कूलों में कुछ ऐसे शिक्षक भी होते हैं जो पूरी शिक्षा प्रणाली के लिए एक मिसाल बनकर सामने आते हैं. महाराष्ट्र के रंजनी कांत इसका जीता जागता उदाहरण हैं.
रंजनी कांत महाराष्ट्र के भोर जो कि पुणे से 100 किलोमीटर दूर हैं वहां एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हैं. इनकी खास बात यह है कि ये हर रोज खतरनाक रास्तों से लगभग 50 किमी का सफर करते हुए अपने स्कूल में पढ़ने वाले एकलौते छात्र को पढ़ाने के लिए जाते हैं ,जी हां इतना सब कुछ सिर्फ एक छात्र के लिए.
यही नहीं जिस रास्ते से रंजनीकांत स्कूल आते हैं वो भी बहुत खतरनाक है और उन्हें बच्चे तक पहुंचने में भी काफी समय लगता है. उन्होंने बताया कि एक बार तो स्कूल की छत से उनपर एक सांप भी गिर गया था.
बता दें कि यह स्कूल 1985 में बनाया गया था और कुछ सालों से यहां बिना छत के सिर्फ चार दीवारी ही बची है. टीओआई की रिपोर्ट्स के अनुसार इस गाँव में बमुश्किल 60 लोगों की आबादी है और ज्यादातर लोग गरीब व मजदूर हैं.
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दरअसल 8 साल पहले जब रंजनीकांत यहाँ पढ़ाने आये थे तब इस स्कूल में 11 बच्चे पढ़ने आते थे पर गरीबी और उच्च शिक्षा की व्यवस्था न होने के कारण ज्यादातर बच्चे स्कूल छोड़ कर कहीं और चले गए हैं.
हालांकि रंजनीकांत अब भी गाँव वालों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए समझाते हैं पर उनकी बात का वहां कोई असर नहीं होता.

2 साल से युवराज अकेला छात्र

पिछले दो साल से 8 साल का युवराज ही इस स्कूल में पढ़ाई कर रहा है. युवराज का एक दोस्त भी पिछले साल कोल्हापुर चला गया जिसके बाद से स्कूल में अब वो अकेला छात्र है.
बता दें कि युवराज सांगले नामक यह छात्र भी रंजनीकांत को स्कूल में नहीं मिलता इसे पढ़ाने के लिए उन्हें उसे ढूँढना पड़ता है.यहां तक की कई बार उन्हें उसे पेड़ पर से उतारकर लाना पड़ता है.
बच्चे की रुचि के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते
इस शिक्षक ने स्कूल की सुविधाएं ठीक करने के लिए काफी काम किया है, स्कूल में ई-लर्निंग की भी कोशिश की गई है. युवराज ही एकमात्र उनका विद्यार्थी है जिसकी रूचि स्कूल में बनाए रखने के लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
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दो साल पहले उन्हें अधिकारीयों की ओर से एक 12 वोल्ट का सोलर पैनल मिला था जिसका उपयोग करते हुए उन्होंने उसकी खातिर एक छोटा टीवी सेट लगवाया है और टेबलेट भी खरीद कर दिया ताकि उसे ई-लर्निंग दी जा सके.
फिर भी स्कूल में और बच्चे न होने के कारण अक्सर वह स्कूल आने से कतराता है.
यहां आपको बताना चाहेंगे कि आज के समय में रजनीकांत की यह मेहनत हम सभी के लिए एक सीख है कि किस तरह वो एक बच्चे तक भी शिक्षा पहुंचाने के लिए इतनी परेशानियां उठा रहे हैं.
रंजनीकांत के इस काम को देखने के बाद हमें यह निर्णय ले सकते हैं कि आज हमारे समाज के लिए कौन जरूरी हैं वो जो सरकारी टीचर इस लिए बनते हैं ताकि जिंदगी भर सरकार के पैसे से आराम फरमा सकें या वो जो एक बच्चे के लिए अपनी जान रोज जाखिम में डाल रहे हैं.

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