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रूढ़ीवादी विचारों को ठेंगा दिखाते हुए नगा समाज की पहली महिला पायलट बनीं रोविनई पोमई

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भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की रोविनई प्यूमाई ने विशेष जनजाती की पहली महिला पायलट बनने का गौरव हासिल किया है. सानपाटी जिले में पुरूल रोसोफिल के गांव में पैदा हुई, रोविनाई प्यूमाई नगा जनजाति के पूमय समुदाय से आती हैं.
रोविनई ने अपने पायलट बनने के सपने पर अटूट विश्वाश के कारण नगा समाज की महिला विरोधी रूढ़िवादी विचारों को तोड़कर खुद के लिए जगह बनाने का प्रयास किया है.
कहां से की पढ़ाई
पोमई ने न्‍यू साउथ वेल्‍स, ऑस्‍ट्रेलिया के बेसियर एविएशन कॉलेज से पढ़ाई की है. जहां उन्‍होंने कमर्शियल पायलट बनने का कोर्स किया है. रोवइनाई अपने समाज की पहली महिला हैं जिन्हें हवाई जहाज का पायलट बनने का लाइसेंस मिला है.
आसान नहीं थी पायलट बनने की राह
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर 2016 में नागरिक निकायों के चुनावों में केंद्र सरकार ने राज्य में अनुच्छेद 234 (टी)  के तहत महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण घोषित किया था. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद से राज्य में अशांति का माहौल बन गया था, जिसमें कई लोग घायल भी हुए थे.
महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसक झड़पों के बाद  नागालैंड माताओं एसोसिएशन (एनएमए) संस्था की अग्रणी महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट मे जाकर अपना पक्ष रखा था. इसके अलावा राज्य में उनके मिले हुए अधिकारों के खिलाफ बन रहे माहौल से भी अवगत कराया था.
 चुनाव में महिलाओं को कोटे देने वाले सरकार के इस कानून को आदिवासी समाज के कुछ लोगों ने पुरानी सभ्यता और परंपराओं का हनन मानते हुए इसका बहिष्कार भी किया था.
ऐसी महिला अधिकारों के खिलाफ बनी हुई स्थिति के बीच रूवेइनई की यह उपलब्धि उनके समाज की महिलाओं को काफी प्रासंगिक बनाती है.
अपने पायलट बनने के सपने को पूरा करते हुए रूवेइनई ने यह साबित कर दिया की, पूर्वोत्तर राज्य की महिलाओं के सपने को साकार करने में कोई भी पितृसत्तात्मक समाज की सोच कभी बाधा नहीं बन सकती.
वहीं सोशल मीडिया में लोग उनके पायलट बनने के बारे में जानने के बाद उनकी प्रशंसा कर रहे हैं.