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देह व्यापार करने वाली महिलाओं की बेटियों को विदेशों मे मिल रहा सम्मान

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रेड लाइट एरिया
फोटो साभार- बीबीसी
रेड लाइट एरिया: सभ्यता और संस्कृति वाले समाज के बीच बसने वाला एक छोटा सा तबका, जहां के लोग खुद अंधेरे में रहकर दूसरों की जिंदगी को रंगीन करते हैं.
महिलाओं के देह व्यापार करने वाले इस इलाके की पहचान इतनी बदनाम है कि इसका नाम लेने पर ही हर कोई मुंह सिकोड़ने लगता है. मगर आज इसी इलाके में वैश्यावृत्ति करने वाली महिलाओं से जन्मी लड़कियां दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही हैं.
ब्रिटेन में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े आर्ट फेयर शो के मंच पर मुंबई के कमाठीपुरा रेड लाइट एरिया में पली बढ़ी यही लड़कियां आज अपने प्रतिभा के जरिए पूरे विश्व में अपना नाम बनाने में कामयाब हुई हैं.
15 से 22 साल की उम्र के बीच की ये लड़कियां आर्ट फेयर के साथ ही ब्रिटेन के कम्यूनिटी सेंटर, थिअटर और मंदिरों में भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी.
इन लड़कियों को स्टेज तक पहुचांने में मदद की है कमाठीपुरा रेडलाइट एरिया में काम करने वाले एनजीओ ‘क्रांति‘ ने.
इन लड़कियों में से एक कमाठीपुरा रेडलाइट एरिया में पली बढ़ी कविता होशमानी ने अपनी जिंदगी के बारे में बात करते हुए कहा कि जब वो 4 साल की थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई. जिसके बाद उनकी मां ने बच्चों को पालने के लिए रेड लाइट एरिया में देह व्यापार का काम शुरू कर दिया.
कविता ने बताया कि उन्होंने पुलिसवालों द्वारा सेक्स करो या पैसे दो का सौदा से लेकर रेडलाइट एरिया में आने वाले मर्दों के द्वारा वहां की महिलाओं पर अत्याचार को करीब से देखा है.
स्टेज पर खुद की कहानी को परफॉर्म करने की बात पर कविता ने कहा कि यह हमारे जीवन का हिस्सा है. ऐसे में थिएटर के जरिए दुनिया से अपने दर्द को साझा करने में हमें कोई दिक्कत नहीं है.
वहीं 21 वर्षीय संध्या ने बताया कि जब वो 10 साल की थी तब ही उनका रेप कर दिया गया. क्योंकि वह भी अपनी मां के साथ रेड लाइट एरिया में रहती थी.  उन्होंने कहा कि आप खुद समझ सकते हैं जब एक 10 साल की लड़की का रेप उसके पिता की उम्र के समान लोगों  द्वारा किया जाता है तो उसके दिमाग पर क्या असर पड़ेगा.
16 वर्षीय रानी अपनी आपबीती सुनाते हुए कहती हैं कि जब वो बहुत छोटी थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी. उन्होंने बताया कि जिस दिन मेरे पिता की मृत्यु हुई उसी दिन शाम को मेरी मां ने दूसरे आदमी से शादी कर ली.
2 साल तक लगातार मेरे नए पिता ने मुझे और मेरी मां को खूब मारा पीटा,मेरी मां से वैश्यावृति कराई फिर मजबूर होकर एक दिन मैं घर छोड़कर भाग आई, और मुझे क्रांति ने अपने आश्रम में जगह दी . जहां आकर मैंने सीखा कि माफी ही सबसे बेहतर उपहार है जो आप खुद को और दूसरों को दे सकते हैं.
ये लड़कियां फ्रिंज सहित पूरे ब्रिटेन में 9 प्ले करेंगी.
फ्रिंज जाने से पहले इन लड़कियों ने लाल बत्ती एक्सप्रेस के नाम से अपने प्ले का प्रीमियर रखा , जिसे लोगों की तरफ से काफी सराहा गया. इस प्ले में इन लड़कियों ने ट्रैफिकिंग का शिकार हुई महिलाओं की कहानी को सबके सामने बयां किया.
शो से हुए अनुभव के बारे में लड़कियों के ग्नुप का कहना है कि ऑडियंस का हमें भरपूर साथ मिला. किसी ने हमारे दर्द में सहानुभूति दिखाई तो कई दर्शक हमारी कहानी देखते हुए रो दिए.
अगले हफ्ते यह ग्रुप ग्लासगो और इल्गेन में परफॉर्म करेगा.
इनकी इस यात्रा के लिए क्राउडफंडिंग के जरिए पैसा जुटाया गया है.
साभार –बीबीसी