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Netram Eye Foundation : हजारों गरीबों की बिमार ऑंखों को रोशन करने का नेक काम कर रही डॉ आंचल

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netram eye foundation

Netram Eye Foundation : अस्पताल को नई उंचाई पर पहुंचाना है सपना

Netram Eye Foundation : भारत की प्राचीन नगरी वाराणसी में जन्मी डॉ आंचल गरीब परिवारों की ऑंखों को रोशन करने का नेक काम कर रही हैं.

आई स्पेशलिष्ट आंचल सेवा भाव के तहत गरीबों के आंखों से संबंधित उपचार मुफ्त या फिर बिल्कुल कम पैसों में करती है.
दरअसल आंचल के पिता खुद एक आर्थोपेडिक सर्जन थे और साथ ही साथ बड़े परोपकारी भी . वो अक्सर गरीब किसानों की गलती से घायल और विकृत उंगलियों को मुफ्त में ही ठीक कर देते थे. इसके एवज में किसान उनके पिता को अनाज दिया करते थे.
ऑंचल बताती हैं कि उन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में ही पिता को परोपकार करते देख उनके पदचिह्नों पर चलने का फैसला कर लिया था.
चूंकि छोटी उम्र में ही आंचल की आंखों पर चश्मा चढ़ गया था जिस वजह से उन्हें बार-बार डॉक्टर के पास जाना पड़ता था. इसलिए आंचल ने आई स्पेशलिस्ट बनने के बारे में सोचा.
किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली में डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद आंचल ने मैक्स और फोर्टिस अस्पतालों में अपनी प्रैक्टिस की. जिसके बाद 2012 में उन्होंने नेत्रम आई फाउंडेशन नाम की खुद की एक संस्था की नीव रखी.
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फोटो साभार – फेसबुक
कब और किस इरादे से शुरू किया नेत्रम आई फाउंडेशन
आंचल बताती हैं कि 2012 में उन्होंने नेत्रम आई फाउंडेशन नाम की एक ऐसी संस्था बनाई जहां आंखों का इलाज होने के अलावा गरीबों की चिकित्सा पर भी खास ध्यान दिया जाता है.
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आपको बता दें कि आंचल के इस फाउंडेशन में गरीब मरीजों की आंखों की जांच मुफ्त में होती है. जबकि चश्मा, दवा और ऑपरेशन के लिए मामूली पैसे लिए जाते हैं.
अपनी शुरूआत के दिनों में आंचल ने सबसे पहले आस-पास के करीब 35 ऑप्टिशियन्स(चश्मे बेचने वाले) को अपने अभियान से जोड़ा और उन्हें आंखों से जुड़ी तमाम बीमारियों के बारे में बताया.
और उनसे कहा कि अगर उनके पास चश्मे की जांच कराने के लिए आए लोगों की आंखों में कोई जटिलता दिखाई देती है तो वो उसकी फोटो खींचकर उन्हें व्हाट्सऐप पर भेज दें.
इसके बाद जब भी ऐसे मामले सामने आते हैं तो आंचल की टीम जिसमें दूसरे डॉक्टर भी शामिल हैं उस व्यक्ति से संपर्क कर उसे समाधान सुझाते हैं.
इस तरह स्मार्टफोन के जरिए ही आंखों की बीमारी का पता चल जाता है और उनका इलाज के बारे में सुझाव भी दिया जाता है.
आंचल बताती हैं कि जब कोई गंभीर मामला सामने आता है, तब वैसे मरीजों को तत्काल उनकी नेत्रम एंबुलेंस से उनके बेस सेंटर में ले आया जाता है जहां उनका बेहतर ढंग से उपचार किया होता है.
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साभार – फेसबुक
आंखों की जागरूकता के लिए लगाती हैं मुफ्त कैम्प
गौरतलब है कि आंचल अपने आई -फाउंडेशन के तहत शहर के कई अलग-अलग इलाकों में आई कैंप भी लगाती हैं. जहां आंखों की जांच तो मुफ्त होती है, लेकिन चश्मे के लिए पचास रुपए कीमत ली जाती है.
ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि कैंप लगाने में काफी खर्च आता है, लेकिन उनकी टीम की यह कोशिश रहती है कि बाजार में बिकने वाले चश्मों के दामों से उनके चश्मे की कीमत बेहद कम हो .
यह नहीं सप्ताह में दो दिन गरीबों की आंखें की जांच करने के लिए मुफ्त ओपीडी भी लगाई जाती है. इस दायरे में सिक्योरिटी गार्ड्स, घरों में काम करने वाली महिलाएं, ऑटो चालक, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग और वरिष्ठ नागरिकों समेत उन लोगों को रखा जाता है जो अपनी इलाज की फीस देने में समर्थ ना हों.
डॉ आंचल लोगों के बीच आंखों से संबंधित बिमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इलाकों की आंगनबाड़ी वर्कर,लोकल एमएलए की भी मदद लेती हैं .
ताकि पूरे एरिया में हर गरीब से अमीर किसी तरह की आंख संबंधित बिमारी के इलाज से अछूता ना रह जाए.
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अस्पताल को नई उंचाई पर पहुंचाना है सपना
द बेटर इंडिया की रिपोट के मुताबिक मामूली सुविधाओं के साथ कभी एक बेसमेंट में शुरू हुआ नेत्रम आई फाउंडेशन आज 5,000 वर्ग फीट जगह में फैल चुका है और इसके पास पांच डॉक्टरों की टीम भी है.
लेकिन आंचल अपनी इस कामयाबी को अभी सिर्फ शुरुआत मानती हैं.
वह उस दिन के सपने देखती हैं, जब इस फाउंडेशन की बड़ी-सी बिल्डिंग होगी, अलग से आई इंस्टीट्यूट होगा, जहां डॉक्टरों को ‘तमसो मां ज्योतिर्गमय’ के सेवा भाव से आंखों की बीमारी दूर करने के बारे में बताया जाएगा और गरीबों की सेवा पर खास ध्यान होगा.

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