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Odisha Doctor : सड़क के अभाव में गर्भवती महिला को पैदल ही 8 किमी अस्पताल लेकर गया डॉक्टर

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Odisha Doctor
गर्भवति महिला को चारपाई पर ले जाता डॉक्टर

Odisha Doctor : डिजिटल इंडिया में ऐसा भी होता है !

Odisha Doctor : इन दिनों देश में डिजिटल इंडिया का नारा खूब जोरो शोरो से दिया जा रहा है, लेकिन जिस देश के कई हिस्सों में रहने वाले लोग अभी तक सड़क जैसी मामूली सुविधा से वंचित है वहां डिजिटल इंडिया की बात करना सिर्फ एक ढ़कोसला साबित हो रही है.

इस कड़वी सच्चाई से तब सामना हुआ जब उड़ीसा के मलकानगिरी में एक गर्भवती महिला को इमरजेंसी में अस्पताल ले जाना था, मगर घर से अस्पताल तक ले जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं था.
दर्द से कराह रही गर्भवती महिला को कच्चे रास्ते से पैदल ले जाना संभव नहीं था, तो ऐसे में पीड़ित महिला का पति और घर पर जांच के लिए आए डॉक्टर ने चारपाई का सहारा लेकर पीड़ित महिला को किसी तरह अस्पताल तक पहुंचाया.
डॉक्टर ने चारपाई से गर्भवती महिला को पहुंचाया अस्पताल
मामला मलकानगिरी जिले के सरिगेटा गांव का है. पास के प्रसिद्ध हॉस्पिटल को सूचना दी गई कि नजदीक के गांव सरिगेट में एक महिला गर्भवती है और उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है.
खबर सुनते ही ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ओंकार होटा तुरंत गांव की ओर रवाना हो गए. वहां जाकर उन्होंने देखा कि महिला की हालत बिगड़ रही है.
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क्योंकि उसकी डिलीवरी हो चुकी थी और बहुत ज्यादा खून बह रहा था. जिस वजह से डॉक्टर ने महिला को तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत महसूस की.
लेकिन गांव में सड़क ना होने के कारण वहां तक एंबुलेंस का पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए डॉक्टर ने महिला को खाट पर लेटाया और उसके पति की मदद से कंधे पर टांग कर ले गए.
डॉक्टर का ऐसा साहस देख ग्रामीण भी आगे आए और उन्होंने भी अपने स्तर से मदद की. सभी ने मिलकर आठ किमी का कच्चा रास्ता तय किया और महिला को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया.
जहां उसका इलाज किया गया, जानकारी के मुताबिक अब महिला और नवजात दोनों ठीक हैं.
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों पर बच्चे को जन्म देती हैं महिलाएं
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में पहाड़ी क्षेत्र विकास में बुरी तरह पिछड़े हुए हैं. इन क्षेत्रों में न सड़कें हैं, और न ही बेहतरीन चिकित्सा सेवाएं हैं.
ऐसे में वहां की महिलाओं को गर्भावस्था में इलाज मुहैया कराना बहुत बड़ी चुनौती रहती है. जिसके चलते दर्द से जूझने पर भी उन्हें 100-150 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है.
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उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में महीनों में ऐसे दो-तीन मामले सामने आ ही जाते हैं, जिनमें चिकित्सा सेवाएं नहीं मिलने के कारण गर्भवती महिलाओं ने सड़क पर ही शिशु को जन्म दिया है.
नेटवर्क का जाल तो दूर, सड़क जाल भी नहीं
देश में सभी सरकारें विकास को अपनी प्राथमिकता बताती हैं, लेकिन अभी भी कईं राज्य ऐसे हैं जहां लोगों को मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल पाई है.
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार समेत कईं ऐसे राज्य हैं जहां आजादी के 70 साल बाद भी सैकड़ों की संख्या में गांवों को मुख्य मार्ग से नहीं जोड़ा जा सका है.
इतना ही नहीं, कई गांव तो अब भी ऐसे हैं, जहां फोन पर बात करने के लिए नेटवर्क की तलाश करनी पड़ती है. यहां लोग संचार सेवा के भी मोहताज हैं,

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